मौलाना ने पाकिस्तान पीएम इमरान से मांगा था इस्तीफा, अब सरकार ने दी ये चेतावनी

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को घेरने वाले जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान को अब सरकार ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को घेरने वाले जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान पर अब सख्त रुख अपना लिया है। दरअसल, पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने मौलाना फजलुर रहमान के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने और प्रधानमंत्री इमरान खान और राज्य संस्थानों के खिलाफ ‘लोगों को भड़काने’ के लिए विद्रोह का मामला दर्ज करने का फैसला किया है।

मिली खबर के मुताबिक, सरकार की वार्ता टीम के सदस्यों के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में रक्षा मंत्री परवेज खटक ने शनिवार को कहा, उन्होंने जनता को ‘भड़काने’ और जनता को खान को गिरफ्तार करने के लिए उकसाने पर फजलुर रहमान के खिलाफ अदालत का रुख करने का फैसला किया है।

उल्लेखनीय है कि मौलाना फजलुर रहमान ने इमरान खान सरकार के विरोध में आजादी मार्च निकाला था। रहमान की अगुवाई में इस आजादी मार्च में विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। रहमान ने शुक्रवार को अपने भाषण के समापन पर खान को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा था, जनता प्रधानमंत्री को उनके निवास पर रोक सकती है और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर सकती है।

रहमान के इस बयान को लेकर रक्षा मंत्री परवेज खटक ने कहा, इस तरह की घोषणा जनता को उकसाने और विद्रोह का काम करने के समान है, आजादी मार्च को लेकर सरकार बिल्कुल भी चिंतित नहीं है, लेकिन विपक्षी नेताओं द्वारा ‘राष्ट्रीय संस्थानों को अपमानित’ करने वाले भाषण दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

खटक ने कहा, सरकार आजादी मार्च से बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाली संस्थाओं के खिलाफ भाषण देना ‘देश के साथ दुश्मनी’ के समान है। खटक ने आगे कहा कि विपक्ष के दबाव में सरकार झुकेगी नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष से बात करने के लिए तैयार है, लेकिन चेतावनी देते हुए ये भी कहा कि इस्लामाबाद प्रशासन के समझौते का उल्लंघन करने पर कानून अपना काम करेगा।

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