सीरिया में अमेरिका की जांच पाकिस्तान के लिए बन सकती है मुसीबत

कुर्द सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज ने उन 29 पाकिस्तानी और अन्य आतंकियों की सूची साझा की है, जो इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ाई के दौरान हिरासत लिये गये हैं।

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Terrorist List
सीरिया में अमेरिका की ये जांच पाकिस्तान के लिए बन सकती है मुसीबत

Delhi: एफएटीएफ (FATF) में पाकिस्तान (Pakistan) पर ब्लैक लिस्ट होने के आसार बढ़ते जा रहे है। दरअसल अमेरिका (America) ने सीरिया (Syria) में इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकी गतिविधियों में पाकिस्तानियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। साफ है कि इस जांच से इमरान खान (Imran Khan) के लिए और मुसीबत बढ़ जाएगी। कुर्द सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज ने उन 29 पाकिस्तानी और अन्य आतंकियों की सूची (Terrorist List) साझा की है, जो इस्लामिक स्टेट से लड़ाई के दौरान हिरासत लिये गये हैं। दिल्ली और वाशिंगटन में आतंकवाद रोधी अधिकारियों के अनुसार, इस लिस्ट में तुर्की और सूडान जैसे देशों के नागरिक चार पाकिस्तानी मूल के आतंकी शामिल हैं, साथ ही पकड़े गए 29 आईएसआईएस (ISIS) के आतंकियों में नौ महिलाएं शामिल हैं।

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जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा बल इन सभी पाकिस्तानी (Terrorist List) नागरिकों से पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही उन्हें भेजने वाले सीरिया में आईएस और अल कायदा जैसे आतंकवादी समूहों या अन्य इस्लामिक समूह जानकारी भी हासिल की जा रही है। चूंकि अफगानिस्तान में स्थित इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत आतंकी संगठन से भी पाकिस्तानी जुड़े हुए हैं, इसलिए इसमें भी अगर कोई उनकी कोई भूमिका होगी तो उसका का पता चल जाएगा। अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की उपस्थिति है, क्योंकि काबुल में एक गुरुद्वारे में आतंकी हमले कर इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत या आईएसकेपी (ISKP) ने इसके संकेत दे दिए थे।

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इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत आतंकी संगठन ने काबुल के केंद्र में एक गुरुद्वारे सहित नागरिक प्रतिष्ठानों पर कई हमले किए थे। ISKP प्रमुख असलम फारूकी को इस बमबारी के लिए गिरफ्तार किया गया था। फारूकी भी न सिर्फ पाकिस्तानी नागरिक था, बल्कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस से भी जुड़ा था। साथ ही फारूकी ISKP में जाने से पहले आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा से भी जुड़ा था। फारूकी अभी अफगान सरकार की गिरफ्त में है क्योंकि अफगानिस्तान ने प्रत्यर्पण के पाकिस्तानी अनुरोध को ठुकरा दिया था। वही पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर होना के लिए चीन की मदद ले रहा है, मगर इस नए रहस्योद्घाटन से भारतीय दावे की पुष्टि होती है कि इस्लामाबाद आतंकवाद का गढ़ है।

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वहीं, एक ओर जहां पंजाब आधारित दो आतंकवादी संगठन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा भारत को निशाना बनाते हैं, उधर इस्लामाबाद अफगानिस्तान में तबाही मचाने के लिए हक्कानी नेटवर्क और आईएसकेपी के माध्यम से तालिबान का समर्थन करता है। इसके अलावा, अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य-पूर्व के देशों में हुए हमलों में भी पाकिस्तानी की भागीदारी अतीत में सामने आई है। इस तरह से अगर अमेरिका जांच में पाकिस्तान या फिर पाकिस्तानी नागरिकों की संलिप्तता आईएसआईएस में पाई जाती है तो इमरान खान के लिए नई मुसीबत होगी।

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