पाकिस्तान: अनुच्छेद 370 हटाना जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक संरचना को बिगाड़ने की एक कोशिश थी- Bilawal Bhutto

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Pakistan: कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान आए दिन कश्मीर के मुद्दे को लेकर अपनी बौखलाहट दिखाता रहता है। बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने 12 मई को बतौर पाकिस्तान के विदेश मंत्री पहली बार कश्मीर के मुद्दे पर बात की। कश्मीर और भारत पर बात करते हुए बिलावल भुट्टो ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा।

गुरुवार को पाकिस्तान में कश्मीर और भारत के मुद्दे पर बात करते हुए बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने कहा, “सत्ता की कमान संभालने के साथ ही जिस चुनौती का हमें सबसे पहले सामना करना पड़ा वो भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ा था। सरकार के सामने भारत प्रशासित कश्मीर के हवाले से एक और मसला सामने आया है।”

भुट्टो ने 5 अगस्त 2019 का जिक्र किया

बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने अपने संबोधन के दौरान भारत सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को लिए गए उस फैसले का जिक्र किया जिसके तहत संविधान से अनुच्छेद 370 हटाकर भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर का विशेषाधिकार खत्म कर दिया गया। भुट्टो ने भारत सरकार के इस फैसल को गैर-कानूनी ठहराते हुए कहा कि ये भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक संरचना को बिगाड़ने की एक कोशिश थी।

बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने अपने संबोधन में दावा किया कि “भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के हिस्से वाले कश्मीर, दोनों ही जगहों पर लोगों ने भारत सरकार के इस फैसले को स्वीकार नहीं किया।” जम्मू-कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग पर टिप्पणी करते हुए भुट्टो ने कहा कि “रिपोर्ट जम्मू-कश्मीर के लोगों को चिंता में डालने वाली है और इसकी मंजूरी से लोगों में डर है।”

 

OIC के महासचिव से की फोन पर बात

पाकिस्तान (Pakistan) के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के महासचिव हुसैन ब्राहिम ताहा से भी बात की। जानकारी के मुताबिक ये वार्ता गुरुवार को फोन के जरिए की गई। इस टेलिफोन वार्ता में भुट्टो ने भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात के बारे में जानकारी दी।

टेलिफोन पर हुई वार्ता में बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को खारिज किया। इसके साथ ही उन्होंने इस घुसपैठ की कोशिश करार दिया। उन्होंने इसे भारत सरकार का गैर-कानूनी और हास्यास्पद प्रयास कहा है, उन्होंने कहा, “भारत सरकार का ये प्रयास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, अंतरराष्ट्रीय कानून और चौथे जिनेवा कंवेंशन का उल्लंघन है। भारत सरकार घाटी के डेमोग्राफी को बदलने की कोशिश कर रही है।”

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