अब नेपाल ने भारत के इस हिस्से पर ठोका अपना दावा

बांध मरम्मत कार्य बंद करने के बाद अगर नेपाल में भारी वर्षा के कारण गंडक नदी का जल स्तर बढ़ता है तो यह एक गंभीर समस्या पैदा कर देगा।

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Gandalak Barrages
Gandalak Barrages

Delhi: भारत के साथ सीमा विवाद के बाद नेपाल सरकार (Nepal Government) ने पूर्वी चम्पारण के ढाका अनुमंडल में लाल बकेया नदी पर बन रहे तटबंध के पुर्निर्माण कार्य को रोक दिया है। बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि नेपाल गंडक बांध (Gandalak Barrages) के लिए मरम्मत कार्य की अनुमति नहीं दे रहा है। जबकि लाल बकेया नदी ‘नो मैंस लैंड’ का हिस्सा है। इसके साथ ही नेपाल ने कई अन्य स्थानों पर मरम्मत का काम रोक दिया है। पहली बार हम लोग ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं। हम मरम्मत कार्य के लिए सामग्री तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।

संजय झा ने आगे कहा कि अगर हमारे इंजीनियरों के पास बाढ़ से लड़ने वाली सामग्री नहीं पहुंचेगी तो बांध की मरम्मत का काम प्रभावित होगा, अगर नेपाल में भारी वर्षा के कारण गंडक नदी (Gandalak Barrages) का जल स्तर बढ़ता है तो यह एक गंभीर समस्या पैदा कर देगा।

सीमा विवाद पर नेपाल ने किये बातचीत के दरवाजे बंद

बिहार सरकार के मंत्री ने कहा कि गंडक बैराज के 36 द्वार हैं, जिनमें से 18 नेपाल में हैं। भारत के हिस्से में पहले से 17वें फाटक तक के बांध की हर साल की तरह इस साल भी मरम्मत की जा चुकी है। वहीं नेपाल के हिस्से में पड़ने वाले 18वें से लेकर 36वें फाटक तक बने बांध की मरम्मत नहीं हो सकी है। नेपाल बांध मरम्मत के लिए सामग्री ले जाने नहीं दे रहा है।

नेपाल बांध के निर्माण स्थल को अपनी जमीन बताकर जबरन विवाद पैदा कर रहा है। लालबकेया नदी का पश्चिमी तटबंध 2017 में आयी प्रलयंकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत का कार्य भी चलता रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इससे पहले जब भी नेपाल बांध की मरम्मत के काम में अडंगा लगाता था तब भारतीय और नेपाली अधिकारी मिल बैठ मामले को सुलझा लेते थे। लेकिन इस साल मामला सुलझाने के बजाय नेपाली सशस्त्र सीमा प्रहरी ही मामले को और उलझाने में लगे हैं।

इस दौरान नेपाल के बंजरहा गांव के ग्रामीणों ने भारत की SSB के साथ भी बदसलूकी की है। विवाद भारत नेपाल की सीमा को दर्शाने वाले पिलर नंबर 345/5 और 345/7 के बीच पांच सौ मीटर की जमीन पर है। इस मामले में जिला प्रशासन ने नेपाल में भारतीय महावाणिज्य दूतावास सहित केन्द्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को पत्र भेजकर स्थिति बताई है।

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