ह्यूस्‍टन वाणिज्‍य दूतावास को लेकर अमेरिका और चीन में तनाव

बीजिंग ने अमेरिका-चीन रिश्‍तों में आए तनाव के लिए वॉशिंगटन को जिम्‍मेदार ठहराया और मांग की कि अमेरिका तत्‍काल ह्यूस्‍टन में चीनी वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने के आदेश को वापस ले।

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Chinese Consulate

Delhi: ह्यूस्‍टन वाणिज्‍य दूतावास (Houston’s Chinese Consulate) को लेकर अमेरिका (America) और चीन (China) के बीच तनाव गहरा गया है। चीन के वाणिज्‍य दूतावास ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उस आदेश को मानने से मना कर दिया है जिसमें शुक्रवार तक वाणिज्‍य दूतावास को खाली करने के लिए कहा गया था। चीन के ह्यूस्‍टन स्थित महावाणिज्‍य दूत काई वेई ने कहा कि उनका कार्यालय ‘अगले आदेश तक खुला रहेगा।’ काई वेई ने कहा कि चीन वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने के आदेश का विरोध कर रहा है। उन्‍होंने एक न्‍यूज वेबसाइट से बातचीत में कहा, ‘आज हम अभी भी सामान्‍य तरीके से काम कर रहे हैं। इसलिए हम देखेंगे कि कल क्‍या होगा।’ चीन ने वियना समेत अन्‍य अंतरराष्‍ट्रीय समझौतों का हवाला देते हुए अमेरिका से दूतावास को बंद करने के आदेश को वापस लेने के लिए कहा है।

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काई ने अमेरिका से आदेश वापस लेने के अनुरोध के साथ कहा, ‘हम हर तरह के हालात के लिए तैयार हैं लेकिन हमने कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है.’ आपको बता दें कि चीन ने अमेरिका को चेंगदू में चीन में कई प्रांतों का कामकाज देखने वाले वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है। इसी केंद्र के पास तिब्‍बत स्‍वायत्‍तशासी इलाके की भी जिम्‍मेदारी है। माना जा रहा है कि तिब्‍बत को लेकर अमेरिकी कदम को देखते हुए चीन ने यह कदम उठाया है।

बीजिंग ने अमेरिका-चीन रिश्‍तों में आए तनाव के लिए वॉशिंगटन को जिम्‍मेदार ठहराया और मांग की कि अमेरिका तत्‍काल ह्यूस्‍टन में चीनी वाणिज्‍य दूतावास (Houston’s Chinese Consulate) को बंद करने के आदेश को वापस ले। इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने गुरुवार को कहा था कि चीन का ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास जासूसी का गढ़ बन गया था। पॉम्पियो ने कहा, ‘इस सप्ताह हमने चीन के ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला किया है क्योंकि यह जासूसी और बौद्धिक संपदा को चुराने का अड्डा बन गया था।’

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विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा, ‘चीन ने हमारी बौद्धिक संपदा चुराई और ट्रेड सीक्रेट चुराए जिसकी वजह से लाखों अमेरिकी नागरिकों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।’ अमेरिका में नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाने के सिलसिले में यह नया कदम है। चीन ने बुधवार को इस आदेश की निंदा करते हुए इसे ‘अपमानजनक’ बताया था और कहा कि अगर इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

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