ब्रिक्स की बैठक से दुनियाभर में जाएगा सन्देश, अकेले नहीं हैं पुतिन

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BRICS Summit: रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के चलते अमेरिका (America) ने दुनियाभर के देशों को धमकाया है। लेकिन अमेरिका (America) की इन धमकियों के बीच भारत ने अपने दोस्त रूस का साथ नहीं छोड़ा है। इस समय भारत ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और कमी से जूझ रहा है। इस कमी से खुद को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर रूस भारत को तेल बेच रहा है। यूक्रेन और रूस के युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने कई तरह के प्रतिबन्ध लगाए थे लेकिन इन प्रतिबंधों के बाद से भारत के रूस से तेल आयात में 25 गुना की वृद्धि हुई है।

इससे रूस और भारत दोनों को फायदा मिला है। खबर आ रही है कि पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) जल्द ही ब्रिक्‍स (BRICS) देशों की बैठक में शामिल होंगे। इस सम्मलेन में रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) भी शामिल हो रहे हैं।

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस से तेल आयात में 25 गुना की वृद्धि की है। युद्ध शुरू होने से पहले भारत रूस से फरवरी में हर दिन 30 हजार बैरल कच्‍चा तेल खरीदता था और जून में यह आंकड़ा 10 लाख बैरल प्रतिदिन के हिसाब पर पहुँच गया। यह यूरोप के रूस से आयात का एक चौथाई हिस्सा है।

भारत पर बना रहे दवाब

अमेरिका (America) समेत कई पश्चिमी देश भारत पर आयात बंद करने का दवाब बना रहे हैं लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि तेल की खरीद का फैसला ऑयल कंपनियों का है। इसलिए तेल आयात चलता रहेगा। भारत के अलावा तुर्की और चीन ने भी रूस से सस्‍ता तेल खरीदने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अमेरिका समेत कई देशों का मानना है कि प्रतिबन्ध लगाने से रूस पर दवाव बनेगा। क्योंकि पश्चिमी देशों का मानना है कि तेल और गैस के पैसे के बल पर रूस यूक्रेन से युद्ध लड़ रहा है। भारत की कंपनी इंडियन ऑयल अभी और तेल खरीद बढ़ाने पर काम कर रही है।

रूस भारत को बड़ी छूट पर तेल दे रहा है जिस वजह से आयात बढ़ रहा है। भारत तेल का बड़ा आयातक देश है और सस्ते तेल की वजह से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा देखने मिल रहा है। इससे महंगाई को काबू में रखने में बड़ी मदद मिल रही है। पुतिन यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार ऐसी किसी बैठक में हिस्सा ले रहे हैं जिसमें दुनिया की शीर्ष अर्थव्‍यवस्‍थाएं शामिल हैं।

ब्रिक्स से पूरी दुनिया में जाएगा सन्देश

पश्चिमी देशों से बहिष्‍कार झेल रहे पुतिन के लिए यह एक अच्छा मौका है और यह इस बात का संकेत भी है कि रूस के ऊपर चाहे कितना भी प्रतिबंध लगा दिया जाए लेकिन वह अकेला नहीं है। रूस के साथ एकजुटता का यह संदेश उस समय और ज्‍यादा साफ हो गया था जब कुछ समय पहले चीन (China) और रूस (Russia) ने ऐलान कर दिया था कि दोनों के बीच संबंधों में अब कोई सीमा नहीं होगी।

भारत समेत ब्रिक्‍स (BRICS) के किसी भी देश ने अभी तक रूस के हमले को निंदनीय नहीं बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार इन बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं के नेता राष्ट्रपति पुतिन के साथ दिखाई देने के इच्‍छुक हैं। उनका कहना है कि पुतिन का ब्रिक्‍स में स्‍वागत है और भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के लिए वह अछूत नहीं हैं। यह सम्‍मेलन हर वर्ष होता है और इस साल भी हो रहा है अब यह सम्मलेन एक तरह से पुतिन के लिए और भी खास बन गया है।

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