एफिल टॉवर बनने के पीछे छिपी है एक दर्द भरी कहानी, हैती से आजादी के बदले मांगे थे डेढ़ लाख करोड़ रुपए

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पूरी दुनिया में चंद ही ऐसी निशानियां हैं जिन्हें शायद दोवारा नहीं बनाया गया है और शायद उनके नाम से ही उस देश की एक अलग ही पहचान मानी जाती है। उनमे से कुछ हैं जैसे भारत का ताजमहल दुबई की बुर्ज़ खलीफा और अमेरिका समेत कई चीज़ें हैं। उन्ही में से एक है एफिल टावर (Eiffel Tower) जो कि फ्रांस में स्तिथ है।

फ्रांस (France) की शान कहा जाता है। लेकिन इसके बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि फ्रांस की शान एफिल टावर और अमेरिका का सिटी ग्रुप इनकी अपनी मेहनत का नतीजा नहीं, बल्कि इसे कैरेबियाई सागर स्थित देश हैती के आर्थिक शोषण से बनाया गया था।

फ्रांस और अमेरिका ने बारी-बारी से किया हैती आर्थिक शोषण

कुछ दस्तावेजों मानी जाए तो, फ्रांस (France) और अमेरिका (America) ने बारी-बारी से हैती का आर्थिक शोषण करके अपनी संपन्नता बढ़ाई है। कभी हैती फ्रांस (France) का गुलाम हुआ करता था। फ्रांसीसी यहां के अश्वेतों को गुलाम बनाकर गन्ने के खेतों में काम करवाते थे, और काफी मुनाफा कमाते थे।

लेकिन एक बार आजादी के लिए जब हैती के नागरिकों ने विद्रोह किया और नेपोलियन की सेना को हरा दिया। उन्हें 1804 में इस शर्त पर आज़ादी दी गई कि 25 सितंबर 1880 में हैती को डेढ़ लाख करोड़ रुपए देने पड़ेंगे। हैती लंबे समय तक यह कर्ज चुकाते हुए कंगाल हो गया था। बस इन्ही पैसों से फ्रांस (France) संपन्न हुआ और एफिल टावर (Eiffel Tower) बनाकर खड़ा कर लिया। 300 मजदूरों ने 2 साल 2 महीनें और 5 दिन लगातार मेहनत करके इसे बनाया था।

जब हैती कर्ज से उबरा तो फ्रांस (France) ने वहां एक नेशनल बैंक खोल दिया जिससे वहां के लोगों से पैसा जमा कराकर उन्हीं को कर्ज देना शुरू कर दिया गया। इसने हैती को ज्यादा कर्जदार बना दिया। अमेरिका (America) ने भी हैती को कंगाल बनाने में भूमिका निभाई है। इस तरह से अमेरिका का सिटी ग्रुप हैती के पैसों से ही खड़ा हुआ है।

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