कहीं भी जाइए मिलेगा फुल नेटवर्क, एक मिनट में 1 gb से अधिक डाउनलोड की स्पीड

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देश में 5G स्पेक्ट्रम (5G Spectrum) की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऐसे में ग्राहकों को इंतेज़ार है कि कब 5G सर्विस को रोलआउट किया जाएगा। इस सब के बाद एक सवाल ये उठता है कि 5G टेक्नोलॉजी नेटवर्क कितना काम करेगी। 5जी टेक्नोलॉजी एक प्रकार की वायरलेस कनेक्टिविटी है, जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम यानी रेडियो वेव के इस्तेमाल से काम किया जाता है। यहां हम आपको 5जी टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

क्या है Radio Waves ?

रेडियो तरंगें (Radio Waves) वे विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves) होती हैं। जिनका तरंगदैर्घ्य १० सेण्टीमीटर से १०० किमी के बीच होता है। रेडियो वेव मानव निर्मित और प्राकृतिक दोनों तरह की हो सकती हैं। मनुष्य के द्वारा इन्हें न ही पहचाना जा सकता है और न ही इन्हें महसूस किया जा सकता है। इन्हें सिर्फ तकनीकी उपकरण के द्वारा ही पकड़ा जा सकता है। एक रेडियो वेब एक तय समय में जितनी बार खुद बदलती है तो वह उसकी फ्रीक्वेंसी कहलाती है।

किसी कारणवश यदि वेव कई लेयर को नहीं हटा पाती हैं तो नेटवर्क में दिक्कत होने लगती है। जैसे बारिश के मौसम में या फिर इसी तरह की कोई और प्राकृतिक समस्या हो तो दिक्कत आ जाती है।

फास्ट कनेक्टिविटी

1G, 2G, 3G सर्विस में 4G में लोअर फ्रीक्वेंसी बैंड इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए 1G, 2G, 3G की स्पीड कम है, लेकिन कवरेज अधिक होती है। इसके चलते ही दूर के इलाकों में स्लो स्पीड वाला 2G या 3G इंटरनेट कनेक्टिविटी मिल जाती है। मगर 4G सर्विस में आमतौर पर हायर फ्रीक्वेंसी बैंड पर इंटरनेट मिल जाता है। दूर जगह या किसी घिरे हुए स्थान पर कनेक्टिविटी कम रहती है। इसके चलते बंद कमरों या बेसमेंट में 4G नेटवर्क पर बात नहीं हो पाती है।

आपको बता दें कि 5जी टेक्नोलॉजी को इस सबसे दूर किया जाता है और 5G टेक्नोलॉजी वाले कनेक्शन में हाई फ्रीक्वेंसी वाला इंटरनेट स्पीड और कवरेज दोनों में 4जी से बेहतर होगा। कुछ समय पहले कहा गया था कि 5G कनेक्टिविटी के साथ 1 जीबी की फाइल करीब 1 मिनट से कम समय में डाउनलोड होगी।

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