सेना में अधिकारी बनना चाहता था जवान, पुलवामा आतंकी हमले में दी जान

देश की सरहद Pulwama Attackके लिए अपनी जिंदगी दे देना इतना आसान नहीं होता। हम जवानों की शहादत महसूस भी नहीं कर सकते।

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Pulwama Terror Attack
देश की सरहद Pulwama Attackके लिए अपनी जिंदगी दे देना इतना आसान नहीं होता। हम जवानों की शहादत महसूस भी नहीं कर सकते।

Dehradun: देश की सरहद के लिए अपनी जिंदगी दे देना इतना आसान नहीं होता। हम जवानों की शहादत महसूस भी नहीं कर (Pulwama Terror Attack) सकते। आज हम उन्हीं की वजह से अपनी जान बचा पा रहे है। किसी जवान की शहादत के बाद उसके परिवार का दर्द कोई नहीं समझ सकता। ऐसा ही एक परिवार है, पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान मोहन लाल रतूड़ी का। कुछ सरकार ने मदद की और कुछ सीआरपीएफ (Pulwama Terror Attack) ने संभाला। आज ये परिवार उस गम से उबरकर फिर उठ गया है। 

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किस पद पर थे विजय-

बता दे शहीद विजय सोरेंगे सीआरपीएफ की 82वीं बटालियन में हेड कॉन्टेबल के पद (Black Day) पर थे, विजय सोरेंग 1993 में सेना में आए थे और 1995 में एसपीजी में कमांडो दस्ता में शामिल हो गए थे। विजय ने दो शादियां की थी। उनकी पहली पत्नी कार्मेला बा रांची में बटालियन में कार्यरत हैं और दूसरी पत्नी बिमला अपने मायके सिमडेगा में रहती हैं। 

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परिवार वालों ने कहा कि मैं सेना का जवान था। बेटा भी सैनिक (Pulwama Attack Date) बनना चाहता था। बचपन से ही उसमें देशभक्ति का भाव था। मैं जब तक जिंदा रहूंगा अपने बेटे के व्यवहार और संस्कार को भूल नहीं सकता। मैं खुद भी फौज से रिटायर हुआ हूं और शहादत को अच्छे से समझ सकता हूं। मातृभूमि की रक्षा में बेटे की शहादत ने मेरा सीना गर्व से बड़ा कर दिया। 

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