Badrinath Dham: बद्रीनाथ धाम के कपाट आज होंगे बंद, भव्य रूप से फूलों से सजाया गया श्री बद्रीनाथ धाम

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Badrinath Dham: बद्रीनाथ धाम (Badrinath Temple) के कपाट आज शनिवार को दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। इस बार बद्रीनाथ धाम (Badrinath Temple) में रिकार्ड 17.47 लाख श्रद्धालु पहुंचे। 2018 में 10.58 लाख जबकि 2019 में 10.48 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे।

2020 और 2021 में कोरोना काल के चलते काफी कम संख्या श्रद्धालु पहुंचे थे। कपाटबंदी के लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। कपाटबंदी के लिए मंदिर को फूलों (flowers) से सजाया गया है। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत शुक्रवार (Friday) को माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना तथा कढ़ाई भोग अर्पित किया गया।

आज के पंच पूजा के अंतिम दिन आस्था,( Faith ) परम्परा,मान्यता और अगाध भक्ति (devotion) का जीवंत रूप दिखाई देता है, आज पूरे दिन दोपहर तक मन्दिर दर्शन करने के लिए कपाट श्रद्धालुओं (devotees) के लिए खुला रहेगा, ठीक 3 बजे बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल जी स्त्री वेशभूषा धारण कर सखी भाव लेकर माता महालक्ष्मी को भगवान बदरी विशाल के सानिध्य में प्रतिष्ठापित करेंगे ।

भू बैकुंठ बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) के मंदिर के कपाट बंद होने पर धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ भारतीय लोक जीवन और संस्कृति तथा मान्यताओं के आदर्श का उच्च सम्मान हजारों वर्षों से निरंतर होता है । शीतकाल के लिए बद्रीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व की पंच पूजाओं के बाद आज दोपहर में जब बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होंगे। भगवान नारायण के सानिध्य में  मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान करते हैं। यह दृश्य  धार्मिक परंपराओं की दृष्टि अद्भुत तो होता ही है। साथ ही भारतीय लोक जीवन का दर्शन (philosophy) भी कराता है ।

भगवान उड़ाते हैं गर्म कपड़े

बद्रीनाथ (Badrinath Dham)  के कपाट बंद होने से पूर्व भगवान को गर्म कम्बल ओढ़ाया जाता है। ऊन का कम्बल माणा की बालिकाऐं बुन कर भगवान को समर्पित करतीं हैं। बद्रीनाथ केदारनाथ (Badrinath Kedarnath) मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डाक्टर हरीश गौड़ ने बताया इस ऊनी कम्बल पर घी लपेट कर भगवान के विग्रह पर लपेटा जाता है ओर यही दिव्य प्रसाद कपाट खुलने के दिन सभी श्रद्धालुओं को बांटा जाता है

6 महीने के लिए खुलते हैं कपाट

चार धाम के प्रमुख मंदिरों के कपाट केवल 6 महीने के लिए खोले जाते हैं। इन धामों के कपाट गर्मियों की शुरूआत अप्रैल के अंत या मई के प्रारंभ में खोले जाते हैं और इनको नवबंर में बंद कर दिया जाता है। नवंबर के समय में पहाड़ों पर बर्फबारी को देखते हुए इनके कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पूरी सर्दियों में ये बंद रहते हैं।

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