“अगर कोई लड़की 18 साल की उम्र में पीएम चुन सकती है, तो साथी क्यों नहीं”-असदुद्दीन ओवैसी

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Asaduddin Owasi
"अगर कोई लड़की 18 साल की उम्र में पीएम चुन सकती है, तो साथी क्यों नहीं"-असदुद्दीन ओवैसी

New Delhi: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई लड़की 18 साल की उम्र में प्रधानमंत्री चुन सकती है तो साथी क्यों नहीं ?

मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार के पितृत्ववाद का एक बहुत अच्छा उदाहरण है। 18 साल की उम्र में, एक भारतीय नागरिक अनुबंध पर हस्ताक्षर कर सकता है, व्यवसाय शुरू कर सकता है, प्रधान मंत्री चुन सकता है और सांसदों और विधायकों का चुनाव कर सकता है। मेरा विचार है कि लड़कों के लिए 21 आयु सीमा घटाकर 18 कर दी जानी चाहिए।”

भारत सरकार पर जमकर किया हमला

AIMIM प्रमुख ने आगे कहा और कहा कि इस सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया है। भारत में बाल विवाह आपराधिक कानून के कारण नहीं बल्कि शिक्षा और थोड़ी आर्थिक प्रगति के कारण हुआ है। इसके बावजूद सरकारी दृश्य हमें बताते हैं कि लगभग 12 मिलियन बच्चों की शादी 18 साल से पहले हो रही है। इस सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया। कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी जो 2005 में 26 प्रतिशत थी, 2020 में घटकर 16 प्रतिशत रह गई।

विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए

ओवैसी ने आगे कहा की ‘डेटा संरक्षण विधेयक में, आपको डेटा साझा करने का अधिकार है लेकिन आप एक भागीदार नहीं चुन सकते हैं। यह किस तरह का तर्क है? इसलिए मुझे लगता है कि यह एक गलत कदम है। मेरे विचार में, उम्र में 21 विधानसभा चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाना चाहिए। यहां तक ​​​​कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि ‘अब गोपनीयता एक मौलिक अधिकार है। कोई भी चुन सकता है कि किससे शादी करनी है, कोई यह चुन सकता है कि बच्चा कब होगा। इस सरकार ने कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं किया है महिलाओं का समग्र विकास के लिए।

ओवैसी ने कहा कि अमेरिका में कई राज्य ऐसे हैं जहां 14 साल बाद शादी की इजाजत है. ब्रिटेन और कनाडा में 16 साल की उम्र में शादी करने का अधिकार है। इससे पहले बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में एक विधेयक का प्रस्ताव कर सकती है।

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