आग से जलकर चटाई से चिपक गई त्वचा, जैन साध्वी ने नहीं छोड़ी साधना…

भारत में धार्मिक चमत्कार कई बार होना कोई नहीं बात नहीं हैं। जनश्रुतियों के अनुसार यहां समय- समय पर तपस्वियों ने अपने तपोबल से ईश्वरीय शक्ति को जीता है। अब ऐसी ही खबर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से आई है।

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Jain Sadhvi

भारत में धार्मिक चमत्कार कई बार होना कोई नहीं बात नहीं हैं। जनश्रुतियों के अनुसार यहां समय- समय पर तपस्वियों ने अपने तपोबल से ईश्वरीय शक्ति को जीता है। अब ऐसी ही खबर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से आई है। दरअसल, छतरपुर की इस घटना के बारे में सुनकर हर कोई हैरान है, वहीं इस घटना से धर्मिक आस्था भी बढ़ गयी है।

बता दें कि छतरपुर के नैनागिर जैन तीर्थ में साधना के दौरान एक जैन साध्वी जलती रहीं, लेकिन उन्होंने अपनी साधना नहीं छोड़ी। जैन साध्वी की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका शरीर 90 फीसदी तक जलकर चटाई से चिपक गया। लेकिन उन्होंने किसी तरह की कोई आवज नहीं निकाली। त्वचा

शरीर 90 फीसदी तक जलकर चटाई से चिपक जाने के बाद भी धर्म के प्रति आस्था को जैन साध्वी ने नहीं छोड़ा, वह साधना खत्म होने तक बैठी रहीं। जानकारी के अनुसार, एक घंटे बाद जब अन्य श्रावक कमरे में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि साध्वी का शरीर आग में बुरी तरह झुलस चुका है।

चटाई अलग करने के चलते उनकी त्वचा उसके साथ ही अलग हो गई। इसके बाद उनको नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। जहां असहनीय जलन और दर्द के बावजूद साध्वी 30 घंटों तक जीवित रहीं। साध्वी ने अंत में मंत्रों के जाप के साथ अपनी देह त्याग दी। मिली खबर के अनुसार, जैन साध्वी सुनयमती माता थीं। जो साधना में लीन थीं, अधिक ठंड को देखते हुए एक श्राविका सिगड़ी में अंगारे रखकर चली गई।

सिगड़ी से अंगारे चटाई पर गिरे और फिर जिस चटाई पर बैठकर सुनयमति माता जी साधना कर रही थीं उसमें लग गई, जिससे शरीर 90 फीसदी तक जलकर चटाई से चिपक गया। जैन साध्वी के देह त्यागने की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे और उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए ।

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