लॉकडाउन के दौरान नोएडा की 300 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर लगा ताला

लॉकडाउन के कारण आई मंदी का सबसे ज्यादा असर गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों पर पड़ा है. गारमेंट की फैक्ट्री में लाखों की मशीनें धूल खा रही हैं

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लॉकडाउन के दौरान नोएडा की 300 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर लगा ताला

Delhi: कोरोना वायरस (Corona Virus) के कारण अर्थव्यवस्था (Economy) पटरी के उतर गई है. बात अगर नोएडा (Noida) यानी गौतमबुद्ध नगर की करे तो यहां 300 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर ताले लग गए हैं और लगभग 5 हजार फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर हैं. लॉकडाउन (Lockdown) के कारण आई मंदी का सबसे ज्यादा असर गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों पर पड़ा है. गारमेंट की फैक्ट्री में लाखों की मशीनें धूल खा रही हैं और सैकड़ों लोगों के काम करने की जगह पर सन्नाटा पसरा है.

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गारमेंट के अलावा लघु मध्यम उद्योगों की हालत (Economy) अच्छी नहीं है. नोएडा के इंडस्ट्रियल इलाके में सन्नाटा पसरा है और चहल-पहल रहने वाले इलाकों में अब TO LET के बोर्ड टंग चुके हैं. यही हाल पूरे नोएडा का है जहां हर फैक्ट्री में 400-500 काम लोग की जगह गेट पर ताला लगा है. गौतमबुद्ध नगर में इस तरह की स्माल इंडस्ट्री की तादात 18 हजार है लेकिन MSME इंडस्ट्री के नोएडा अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा कहते हैं कि पांच हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां बंदी की कगार पर हैं. सुरेंद्र नाहटा ने कहा कि कामर्शियल एक्टीविटी बंद होने से माल नहीं जा रहा है.

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बंद पड़ी फैक्ट्री और तनख्वाह समय से न मिलने का तनाव नोएडा के डीएम आफिस में दिख रहा. आए दिन यहां मजदूर तनख्वाह न मिलने की शिकायत लेकर आते हैं और पुलिस प्रशासन से उनकी झड़प होती है. एक महिला वर्कर ने कहा कि हमारी तनख्वाह नहीं दी. पहले तीन महीना फैक्ट्री बंद रही, अब खुली है तो हम लोगों को रख नहीं रहे हैं. जो फैक्ट्रियां खुली हैं, वहां बेरोजगारों का मेला लगा है. दुसरी ओर मुंबई के सोनू सूद भी नोएडा के मजदूरों की उम्मीद के तौर पर उभरे हैं. वे गारमेंट एसोसिएशन के प्रधान ललित ठुकराल के साथ काम करके 20 हजार मजदूरों को काम पर लगाने का वादा कर रहे हैं.

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नोएडा की 18 हजार फैक्ट्रियों के मालिक और उनमें काम करने वाले 10 लाख से ज्यादा मजदूर दोनों ही आर्थिक (Economy) मंदी (GDP) से जूझ रहे है. लॉकडाउन में बेहतर प्रबंधन करके मजदूरों को घर पहुंचाने वाले सोनू सूद अब नोएडा के मजदूरों की समस्या सुलझाने में लगे हैं लेकिन फैक्ट्री मालिकों के करोड़ों रुपये का नुकसान और लाखों बेरोजगार लोगों की समस्या इतनी बड़ी है कि इसके लिए सरकार को भी बड़ा प्रयास करना पड़ेगा तभी लोगों की टूटती उम्मीदों को बचाया जा सकता है.

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