कृषि बिल को लेकर विरोध जारी, उपचुनाव में किसका साथ देंगे किसान?

किसानों से जुडे तीन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गए है, इसके बावजूद किसान गुस्से में दिखाई दे रहे है।

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Agriculture Bill 2020
कृषि बिल को लेकर विरोध जारी, उपचुनाव में किसका साथ देंगे किसान?

New Delhi: किसानों से जुडे तीन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गए है, लेकिन बिल पास होने के बावजूद किसान गुस्से में दिखाई दे रहे है। किसानों का संगठन एकजुट होकर (Agriculture Bill 2020) इस बिल के खिलाफ नारजागी जताते हुए विरोध कर रहा हैं। ऐसे में हरियाणा, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव में बीजेपी सरकार को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इस बिल का विरोध विपक्षी दल भी कर रहे है।

आपको बता दें कृषि सुधार कानून को किसान अपने हित में नहीं मान रहे हैं। इसके खिलाफ किसान एकजुट होकर आवाज बुलंद करने लगे हैं। किसानों की सबसे ज्यादा नाराजगी हरियाणा, पंजाब, यूपी और एमपी में देखने को मिल रही है, जिसमें विपक्ष भी किसानों का साथ दे रहा है। उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों के नेताओं ने एकजुट होकर (Agriculture Bill 2020) मोदी सरकार खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कृषि विधेयक के खिलाफ अखिल भारतीय किसान यूनियन ने सूबे में 25 सितंबर को चक्का जाम करने की बात कही हैं। 25 सितंबर को किसान सड़क पर उतरकर सरकार के इस बिल का विरोध करते हुए नजर आएंगे।

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यूपी में 8 सीटों पर होने है उपचुनाव-

उत्तर प्रदेश में आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। कानपुर के घाटमपुर, जौनपुर के मल्हनी, रामपुर के स्वार, बुलंदशहर के सदर, आगरा के टूंडला, देवरिया की देवरिया सदर, उन्नाव की बांगरमऊ और अमरोहा की नौगावां सादात सीट है। इनमें चार सीटें पश्चिम यूपी की हैं।

25 सितंबर को हरियाणा रहेगा बंद-

कृषि विधेयक के खिलाफ हरियाणा में पूरी तरह से 25 सितंबर को बंद रहेगा। प्रदेश में किसान पिछले एक हफ्ते से सड़कों पर उतरे हुए हैं। हरियाणा के किसान संपूर्ण कर्ज माफी न होने पर पहले ही सरकार से नाराज चल रहे थे और कृषि कानूनों को लेकर अब उनका गुस्सा और भी बढ़ गया है।

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MP में किसानों का गुस्सा

मध्यप्रदेश में किसानों के गुस्से की वजह से 2018 में बीजेपी को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहारे दोबारा से सत्ता पाने वाले शिवराज सिंह चौहान उपचुनाव के लिए (Agriculture Bill 2020) कोई गलती नहीं करना चाहते हैं। एमपी में 28 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होने वाले हैं, इनमें ज्यादातर सीटें ग्रामीण इलाके से आती हैं। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे से बेहतर किसान हितैषी बताने में लग गए हैं।

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