‘ड्यूटी में देरी पर होता है एक्शन, लापता होने पर सरकार दिखा रही लापरवाही’

मुठभेड़ में लापता सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मनहास Rakeshwar Singh की पत्नी ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए है।

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Rakeshwar Singh Manhas
मुठभेड़ में लापता सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मनहास Rakeshwar Singh की पत्नी ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए है।

Naxalites: छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा बॉर्डर पर नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में लापता सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मनहास (Rakeshwar Singh Manhas) की पत्नी ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए है। राकेश्वर सिंह की पत्नी मीनू ने कहा है कि अगर एक जवान ड्यूटी पर पहुंचने में देरी कर दे तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है लेकिन जब जवान 3 अप्रैल से लापता है तो सरकार को कोई लेना-देना नहीं है। 

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राकेश्वर की पत्नी मीनू (Meenu) ने कहा कि‘अगर कोई जवान अपनी छुट्टियां खत्म होने के एक दिन बाद ड्यूटी जॉइन करता है तो उसके खिलाफ ऐक्शन होता है। अब जब 3 अप्रैल से जवान लापता है तो सरकार की ओर से कोई ऐक्शन नहीं लिया गया है। हम चाहते हैं कि सरकार कोई एक्शन ले जिससे जल्द से जल्द रिहा मिले।’ 

बता दें मुठभेड़ के बाद राकेश्वर सिंह (Rakeshwar Singh Manhas) मनहास लापता चल रहे है। नक्सलियों ने चिट्ठी लिखकर ये बताया है कि जवान उनके कब्जे में है। हालांकि, नक्सलियों ने ये शर्त भी रखी है कि सरकार एक मध्यस्थ नियुक्त करे जिसके बाद जवान को रिहा कर दिया जाएगा।  

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क्या है मध्यस्थ नियुक्त 

ये एक अधिनियम जो कई सालों पहले लागू नहीं किया गया था। मेलमिलाप अधिनियम 1996 (Reconciliation Act 1996) के नाम से जाना जाता है। एनएचएआई ने दार्जिलिंग में सैयदाबाद टी कंपनी की एक जमीन का अधिग्रहण किया था। उसके एवज में दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर विवाद खड़ा होने पर चाय कंपनी ने सरकार से मध्यस्थ नियुक्त (Reconciliation Act 1996) करने का अनुरोध किया।

जिसके बाद सरकार ने जल्दबाजी में मध्यस्थ नियुक्त (Reconciliation Act 1996) कर दिया। कई लोगों का कहना है कि ये गेरकानूनी था। इसलिए मध्यस्थ ने मामला हाथ में लेने से मना कर दिया और कानूनी दायरे को लेकर 12 सालों तक विवाद चलता रहा, जो आज भी सुलझता हुआ नजर नहीं आ रहा।

तीन अप्रैल को सुरक्षा बल के दो हजार जवान हमला (Naxalites Attack) करने जीरागुडेम गांव के पास पहुंचे थे, इसे रोकने के लिए पीएलजीए ने हमला किया है। इस कार्रवाई में 24 जवान मारे गए और 31 घायल हो गए। नक्सलियों ने बयान में कहा है कि एक जवान को बंदी बनाया गया है जबकि बाकी जवान वहां से भाग गए।  

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