पिता के लाख मना करने पर भी कश्मीर लौटे थे अजय

पिता द्वारका नाथ पंडिता के लाख मना करने पर भी कश्मीर लौटने वाले अजय चाहते थे कि घाटी में पंडितों को फिर वही जगह मिल सके।

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AJAY PANDITA
AJAY PANDITA

Jammu And Kashmir: अनंतनाग के लकबावन गांव में दो दिन पहले अजय पंडिता(Ajay Pandit) नाम के शख्स की हत्या हुई है। जम्मू(Jammu And Kashmir) के सुभाषनगर का रहने वाला अजय का कहना था कि अगर कश्मीर में सेना(Indian Army) ड्यूटी कर रही है जो हमें वहां से जाने की जरूरत क्या है। अजय के पिता द्वारका नाथ पंडिता सुभाषनगर के इसी मकान में बेटे को याद करते कहते हैं, बेटा शहीद हुआ है मेरा…देश की सेवा के लिए।

दहशत के दशक में पिता द्वारका नाथ पंडिता के लाख मना करने पर भी कश्मीर लौटने वाले अजय(Ajay Pandit) चाहते थे कि घाटी(Jammu And Kashmir) में पंडितों को फिर वही जगह मिल सके। इसलिए जब कश्मीरी पंड़ित घाटी से दूसरे जगह बस रहे थे अजय ने अपने रोजगार के लिए बैंक से लोन लिया।

अनंतनाग में दर्जनों आतंकी मुठभेड़ और हिज्बुल की तमाम धमकियों के बावजूद अजय ने सड़क पर उतरकर लोगों से वोट मांगने की मुहिम शुरू की। हिम्मत का असर इतना हुआ कि लकबावन में बीजेपी प्रत्याशी को हराकर अजय सरपंच बने। करीबी बताते हैं कि वो एक साल से सुरक्षा मांग रहे थे, लेकिन आतंक से प्रभावित कश्मीर में सुरक्षा नहीं मिली और मांग का अंत अजय की मौत से हुआ।

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अनंतनाग में अजय पंडिता भारती के नाम बनी पहचान

अजय कहते थे कि वो देशभक्त हैं और इसीलिए उनकी पहचान अनंतनाग में अजय पंडिता भारती के रूप में हो गई थी। हालांकि अजय की असंतुष्टि इस बात से जरूर थी कि सरकारों ने सरपंचों की मदद नहीं की और वो कई बार ये कहते आए थे कि सरकार ने सरपंचों का चयन कराया है और इस्तेमाल भी कर रही। लेकिन सब के बीच सरपंचों पर कितना खतरा है इसकी जानकारी किसी को नहीं। अजय का कहना था कि सरकार निचले तबके के जनप्रतिनिधियों के साथ सौतेला व्यवहार करती है और इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता कि उनकी जरूरतें क्या हैं।

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