जब तक इंसाफ नहीं तब तक शांत नहीं, दलित भोजन माता

0
63
Sunita Devi Bhojan Mata
जब तक इंसाफ नहीं तब तक शांत नहीं-दलित भोजनमाता

उत्तराखंड: उत्तराखंड में दलित भोजन माता के हाथ का खाना खाने से मना करने का मामला अब गरमा चुका है जिसको संज्ञान में लेते हुए उन्हें वापस नौकरी देने की घोषणा की गई लेकिन अभी तक उन्हें बापस सम्मान के साथ नौकरी नहीं मिली। भोजनमाता कहती हैं की जब तक उन्हें नौकरी वापस नहीं मिल जाती शांत नहीं बैठेंगी।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल यह मामला उत्तराखंड के चम्पावत जिले का है जहाँ कुछ सवर्ण छात्रों ने एक सरकारी स्कूल में दलित भोजनमाता के हाथों का खाना खाने से मना कर दिया। जब यह मामला सुर्ख़ियों में आया तो प्रशासन ने मदद करने के बजाय उन्हें नौकरी से हटा दिया और उनकी जगह नयी नियुक्ति का आदेश दे दिया। चम्पावत (Champawat) में सूखीढांग इंटरकॉलेज है जिसमे 230 छात्र छात्राएं हैं जिसमे 66 छात्र छात्राएं कक्षा 6 से 8 तक के हैं जिनके लिए खाना बनता है।

विवाद सुलझने के बाद भी उलझा हुआ है।

मामले को संज्ञान में रखते हुए प्रशासन ने एक बैठक बुलाई जिसमे एसडीएम हिमांशु कफल्टिया,सीओ आरसी पुरोहित, एसपी देवेंद्र पींचा व DEO सत्यनारायण समेत कई अधिकारीगण मौजूद रहे। इसके अलावा सवर्णो और दलितों को भी बुलाया गया था। भोजनमाता सुनीता देवी (Bhojanmata Sunita Devi) को इस बैठक में बोलने तक नहीं दिया गया और इसी बैठक के बाद यह भी बताया गया की मामला सुलझ गया है लेकिन मामला सुलझा नहीं। भोजनमाता को यह नहीं बताया गया उन्हें दोवारा आना है या नहीं। इस पर भोजनमाता ने कहा है की जब तक ससम्मान सब मेरे हाथ का खाना नहीं खा लेते मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

दिल्ली सरकार ने दलित भोजनमाता को दिया नौकरी का प्रस्ताव

दिल्ली सरकार ने जब यह मामला सुना तो भोजनमाता को दिल्ली में नौकरी देने का ऐलान कर दिया। जिस पर भोजनमाता ने कहा की मैं दिल्ली में नौकरी करने से मना नहीं कर रही लेकिन अगर मुझे भोजनमाता के अलावा कोई और नौकरी दी जाये तब। क्योंकि दिल्ली में 3000 हज़ार की नौकरी का क्या फायदा ? जबकि दिल्ली में 7 से 8 हज़ार का तो कमरा ही मिलेगा। मुझे वापस यहीं नौकरी मिल जाये तो ज़्यादा बेहतर है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here