Shardiya Navratri Day 4: नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की ऐसे करें अराधना, इस मंत्र को जपने से होगी धन में वृद्धि

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मां कुष्मांडा
मां कुष्मांडा

Shardiya Navratri Day 4: 26 सितंबर को शुरू हुआ था नवरात्रि का त्योहार। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। नवरात्रि में देवी की पूजा करने से भक्तों को काफी ज्यादा ज्ञान और आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं 29 सितंबर को शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का चौथा दिन है। इस दिन मां कुष्मांडा (Maa Kushmanda) की पूजा की जाती है। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक, मां कुष्मांडा की पूजा अराधना से मनुष्य के रोग दूर होते है। साथ ही बल और धन में वृद्धि होती है।

आइए आपको बताते है मां कुष्मांडा की पूजा विधि, स्वरूप, मंत्र और भोग के बारे में।

इस मंत्र से मां कुष्मांडा होंगी प्रसन्न

नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा (Maa Kushmanda) को समर्पित है। मां कुष्मांडा का मंत्र ‘ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडा नम:’ जपने से मिलेगा आपको फल और धन में वृद्धि। साथ ही नवरात्रि का चौथा दिन अपने के लिए बनाए खास, भेजें ये संदेश:-

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै

नमो नम:

मां कुष्मांडा की पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा (Maa Kushmanda) के नाम होता है। लोगों को मां कुष्मांडा की पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। पूजा के समय देवी को पीला चंदन लगाने से देवी अपने भक्तों से काफी प्रसन्न होती है। इस दिन मां कुष्मांडा को कुमकुम, मोली और अक्षत भी चढ़ाया जाता है। साथ ही पान के पत्ते में केसर डाल कर ‘ओम बृं बृहस्पते नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए।

ये भोग चढ़ाने से मां कुष्मांडा होंगी खुश

मां कुष्मांडा (Maa Kushmanda) को चौथी नवरात्रि के दिन मालपुआ का भोग लगाना चाहिए। इससे बुद्धि, धन और निर्णय लेने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। ऐसा करने पर सभी रोग नष्ट भी होने लगते है। साथ ही मालपुआ को भोग लगाने के बाद सबसे पहले उसे ब्राह्मण को खिलाए। ब्राह्मण के खाने के बाद उस भोग को खुद भी खाएं।

कैसा है मां कुष्मांडा का स्वरूप ?

शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा (Maa Kushmanda) की पूजा अराधना की जाती है। मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं है। आपको बता दें कि मां कुष्मांडा को मां अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही मां कुष्मांडा के आठ हाथ होते है। वहीं हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र भी होते है।

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