जन्माष्टमी पर बन रहा द्वापर युग, इस पावन पर्व पर गलती से भी ना करें ये काम

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Janmasthami 2021
Krishna Janmashtami 2021: श्रीकृष्ण के जन्म के दिन द्वापर युग जैसा संयोग बना हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में मध्य रात्र को हुआ था

Krishna Janmashtami 2021: श्रीकृष्ण के जन्म के दिन द्वापर युग जैसा संयोग बना हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में मध्य रात्र को हुआ था बता दें कि इस वर्ष भी जन्माष्टमी पर ऐसा ही संयोग बन रहा है जान लिजिए कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के श्रद्धालुओं को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

गलती से भी ना करें यें काम

  • भगवान श्री हरि की पीठ के दर्शन नहीं करें क्योंकि एसा करने से आपके अच्छे कर्मो पर प्रभाव पड़ता है और अधर्म बढ़ता है इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है हमेशा भगवान कृष्ण के दर्शन मुख की ओर से करने चाहिए।
  • इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालू को रात 12 बजे से पहले अपना व्रत नहीं खोलना चाहिए जन्म समय से पहले व्रत खोलने से आपकी उपासना अधूरी रह जाती है।
  • गलती से भी आप जनमाष्टमी के दिन तुलसी की पत्ती को ना तोड़े क्योकि भगवान विष्णु को श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है और मान्यता के अनुसार तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं. इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना शुभ नहीं माना जाता है।
  • जन्माष्टमी का व्रत नही रखने वोले लोगो को भी इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए. एकादशी और जन्माष्टमी के दिन चावल और जौ से बनी चीजें नही खानी चाहिए।
  • भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर लहसुन, प्याज या कोई भी एसा भोजन नहीं करना चाहिए और इस दिन घर में मांस और शराब नहीं लाना चाहिए।
  • जन्माष्टमी के दिन गाय पर अत्याचार नही करें सभी जानते है भगवान कृष्ण को गाय से बहुत प्रेम था कान्हा बचपन में गाय के साथ ही खेलते थे. ऐसी मान्यता है कि जो भी गाय की पूजा करता है उसे श्री कृष्ण का आशीर्वाद बना रहता है।
  • कृष्ण जन्माष्टमी पर किसी का अनादर ना करें भगवान कृष्ण के लिए अमीर या गरीब सभी भक्त एक समान है किसी भी गरीब का अनादर करने से श्रीकृषण नाखुश हो सकते हैं।
  • इस दिन पेड़ों को काटना शुभ नही माना जाता श्री कृष्ण हर चीज में बसते हैं और हर चीज उनमें बसती है बल्कि हो सके तो इस दिन ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए. इससे घर और परिवार में सुख और शांति बनी रहती है।
  • जन्माष्टमी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य होता है और इस दिन पूरे पवित्र मन-तन से भगवान की पूजा करनी चाहिए।

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