भाई दूज पर ऐसे करें पूजा, जानें पौराणिक कथा

भाई दूज को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। आईए जानते है आखिर क्यों मनाया जाता है भाई दूज।

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Bhai Dooj 2020
भाई दूज पर ऐसे करें पूजा, जानें पौराणिक कथा

New Delhi: भाई दूज (Bhai Dooj 2020) को यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज पर बहनें रोली एवं अक्षत से अपने भाई के मस्तक पर तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद देती हैं। नियम के अनुसार भाई अपनी बहन को उपहार या दक्षिणा भी देता है। भाई दूज त्योहार के रूप में पूरे भारत भर में धूमधाम से मनाया जाता है।

किस दिन है भाई दूज, जानें विधि और विधान

मान्यता है कि इस दिन अगर बड़े से बड़ा पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे। भाई दूज (Bhai Dooj 2020) के दिन शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रख आती हैं। उस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। इस दिन जो भी बहन भाई की आयु के लिए दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या फिर आसमान में उरता चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुनाएगा।

पौराणिक मान्यता है कि यदि संभव हो तो भाई दूज के दिन भाई बहन को अवश्य ही एक साथ यमुना तट पर जाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भाई को बहन के यहां तिलक करवा कर ही भोजन करना चाहिए। अगर किसी कारण से भाई बहन के यहां ना जा सके, तो बहन भाई के यहां जा कर तिलक लगाए। बहन उस दिन तरह-तरह के पकवान−मिष्ठान का भोजन बना कर भाई को तिलक करने के बाद खिलाएं। बहन भाई को तिलक लगाने के बाद ही भोजन करे। यदि बहन सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ भाई के लिए प्रार्थना करे तो वह जरूर पूरी होती है।

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भाई दूज की विधि

इस पर्व को मनाने की विधि (Bhai Dooj Vidhi) हर जगह अलग-अलग होती है। उत्तर भारत में यह चलन है कि इस दिन बहनें भाई को अक्षत व तिलक लगाकर नारियल देती हैं वहीं पूर्वी भारत में बहनें शंखनाद के बाद भाई को तिलक लगाती हैं और भेंट स्वरूप उपहार देती हैं। भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल लगाती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे-धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कहती हैं जैसे “गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े”।

आखिर क्यों मनाया जाता है भाई दूज? 

भगवान सूर्यदेव (Bhai Dooj Katha) की पत्नी का नाम छाया है। और उनकी ही कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ है। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा प्रेम करती हैं। वह उनसे बराबर बोला करती कि वह उनके घर आकर भोजन करें, लेकिन यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात टाल देते थे। एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन करने के लिए बुलाया और यमराज बहन के घर गए थे। बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्ति प्रदान की।

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भाई को देखते ही यमुना बहुत खुश हुए उसके बाद उन्होंने बड़े ही प्यार से भाई का स्वागत सत्कार किया तथा तरह-तरह के भोजन बनाकर भाई को खिलाया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा। बहन ने भाई से कहा कि आप हर वर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाएगी, उस दिन आप बहन को यह आशीर्वाद देंगे की उसके भाई को आपका कोई भय ना हो।

उसके बाद यमराज तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमपुरी चले गये। ऐसी मान्यता है कि जो भाई भाईदूज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इस प्रकार सारी बहनें अपने भाइयों के लिए पूजा करती है और उन्हें आशीर्वाद देती है कि उनकी आयु लंबी हो वो स्वस्थ रहें।

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