कच्चे तेल की जंग का हुआ अंत, अब उत्पादन में होगी कटौती…

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Crude oil

कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर रूस और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चली आ रही लड़ाई अब खत्म हो गई है. दरअसल, ओपेक प्लस देशों के संगठन और रूस के बीच समझौता हुआ है. इसी वजह से कच्चा तेल रविवार को 1 डॉलर प्रति बैरल बढ़ा.

बता दें कि अमेरिकी WTI क्रूड 23 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर, जबकि लंदन का ब्रेंट क्रूड 32 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक, उसके सहयोगी उत्पादक देशों ( OPEC+) और रूस के बीच हुए समझौते में अमेरिका भी शामिल है.मालूम हो कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन की सहमति से ही ये समझौता हो सका है. इससे पहले पुतिन ऐसे समझौते के लिए राजी नहीं हो रहे थे.

जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए हैं कि उत्पादन में रिकॉर्ड कटौती करेंगे. ताकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सके. इस समझौते से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई में 20 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके पहले रूस और सऊदी अरब तेल उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी करते जा रहे थे.

कच्चे तेल को इससे पहले भारी गिरावट का सामना करना पड़ा और एक समय तो ब्रेंट क्रूड 20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था. कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से दुनिया में कच्चे तेल की मांग वैसे ही काफी कम हो गई थी, ऐसे में दोनों पक्षों द्वारा उत्पादन लगातार बढ़ाने से ये पूरी तरह से टूट गया था.

ओपेक प्लस देशों के संगठन और रूस के बीच समझौता-

ओपेक प्लस देशों के संगठन और रूस के बीच समझौता के अनुसार, OPEC+ देश मई, जून में कच्चे तेल के उत्पादन में 97 लाख बैरल प्रति दिन तक कटौती करने पर सहमत हुए हैं. इस बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दबाव बना रहे थे ताकि तेल की कीमतों में गिरावट पर अंकुश लगे. असल में अमेरिका को भी इसका बड़ा नुकसान हो रहा था.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि1 मई से कुल वैश्विक उत्पादन में 2 करोड़ बीपीडी या 20 फीसदी की कटौती की जा सकती है.

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