भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस डील पर मुहर, ट्रेड डील पर होगी बात

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दूसरे दिन मंगलवार की सुबह राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस मौके पर डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बेटी इवांका ट्रंप भी मौजूद थीं। राष्ट्रपति भवन में ट्रंप के आने पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी को राजघाट पर श्रद्धांजलि दी।

हैदराबाद हाउस में मोदी-ट्रंप के बीच द्वीपक्षीय वार्ता हुई। साझा बयान जारी करते हुए दोनों नेताओं ने बताया कि उन्होंने रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं वह आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। इसके अलावा जल्द ही ट्रेड डील पर बातचीत शुरू का जाएगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मेलानिया और मैं भारत की महिमा और भारतीय लोगों की असाधारण उदारता और आदरता से विस्मित हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम आपके गृह राज्य के नागरिकों द्वारा किए गए शानदार स्वागत को हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने को सहमत हैं। हमने आज अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर सहित दुनिया में बेहतरीन- उन्नत अमेरिकी सैन्य उपकरणों के यूएस डॉलर 3 बिलियन से अधिक की खरीद के लिए भारत के साथ समझौतों के साथ अपने रक्षा सहयोग का विस्तार किया। ये हमारी संयुक्त रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएंगे।’

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण पार्टनरशिप्स में है और इसलिए आज राष्ट्रपति ट्रंप और मैंने हमारे सम्बंधों को कॉम्प्रिहेन्सिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। आतंक के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराने के लिए आज हमने अपने प्रयासों को और बढ़ाने का निश्चय किया है। आज हमारे बीच ड्रग तस्करी, नार्को-आतंकवाद और संगठितत अपराध जैसी गंभीर समस्याओं के बारे में एक नए मेकैनिज्म पर भी सहमति हुई है। कुछ ही समय पहले स्थापित हमारी स्ट्रैटेजिक एनर्जी पार्टनरशिप सुदृढ़ होती जा रही है। और इस क्षेत्र में आपसी निवेश बढ़ा है। तेल और गैस के लिए अमेरिका भारत का एक बहुत महत्वपूर्ण स्त्रोत बन गया है। हम एक बड़ी ट्रेड डील के लिए बात करेंगे।

आपको बता दे कि बातचीत में दोनों नेताओं द्वारा विभिन्न द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। इनमें व्यापार और निवेश, रक्षा एवं प्रतिरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, अफगानिस्तान में तालिबान के साथ प्रस्तावित शांति समझौता तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिति, शामिल होने की उम्मीद है।

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