फांसी से बचा Yasin Malik, टेरर फंडिंग मामले में आतंकी को NIA कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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Yasin Malik

Yasin Malik को NIA कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।  स्पेशल NIA जज प्रवीण कुमार ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। उम्रकैद के अलावा यासीन मलिक पर NIA कोर्ट ने 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यासीन मलिक को धारा 121 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 10 मामलों में आतंकी यासीन मलिक को सजा सुनाई गई है, जिनमे से दो मामलों में उम्रकैद की सजा मिली है। UAPA की धारा 13 में 5 साल की सजा है, UAPA की धारा 15 में 10 साल की सजा है। आपको बता दें 19 मई को दिल्ली की एक अदालत ने यासीन मलिक को आतंकवाद को फंडिंग करने के मामले में दोषी ठहराया था।

आतंकवाद को फंडिंग करने के मामले में यासीन मलिक (Yasin Malik) को लेकर पाकिस्तान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। पाकिस्तान के कुछ लोग यासीन मलिका का समर्थन कर रहे हैं। अपने समर्थन में उनका कहना है कि भारत ने यासीन पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए, भारत पर मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं।

शाहिद अफरीदी ने किया ट्वीट

यासीन मलिक का समर्थन करने वालों में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी भी शामिल हैं। शाहिद अफरीदी ने ट्वीट कर लिखा है, “भारत के भयंकर मानवाधिकार उल्लंघन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली आवाज़ों को दबाने की भारत की लगातार कोशिशें बेकार हैं। यासीन मलिक के ख़िलाफ़ लगाए गए झूठे आरोप कश्मीर की आज़ादी के संघर्ष को रोक नहीं सकते। संयुक्त राष्ट्र से कश्मीरी नेताओं के ख़िलाफ़ इस पक्षपाती और अवैध सुनवाई पर ध्यान देने की अपील है।”

भारतीय क्रिकेटर अमित मिश्रा ने यासीन मलिक (Yasin Malik) को लेकर किए गए शाहिद अफ़रीदी के ट्वीट पर जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “प्रिय शाहिद अफ़रीदी वो कोर्ट में रिकॉर्ड पर दोषी सिद्ध हुए हैं। आपकी जन्मतिथि की तरह सब कुछ भ्रामक नहीं होता।”

 

पाकिस्तानी पत्रकार ने किया ट्वीट

यासीन मलिक को लेकर पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर ने महिलाओं के नारेबाजी का वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “डर का कोई निशान नहीं। मैसुमा श्रीनगर में ये यासीन मलिक का घर है, जहां आज़ादी के समर्थन में कश्मीरी महिलाएं नारे लगा रही हैं।”

पाकिस्तान के अब्दुल बासित ने यासीन मलिक पर भारत के फैसले को ‘शर्मनाक’ और ‘न्यायिक आतंकवाद’ कहा है। आपको बता दें कि अब्दुल बासित भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके हैं।

 अब्दुल बासित ने ट्वीट कर लिखा, “शर्मनाक, भारतीय कंगारू कोर्ट का न्यायिक आतंकवाद निंदनीय है। दुनिया को जाग जाना चाहिए इससे पहले की मोदी के तहत भारत कभी ना बदलने वाला फासीवादी देश बन जाए और क्षेत्र या उससे ज़्यादा के लिए गंभीर ख़तरा ना बन जाए।”

इमरान खान ने भी किया विरोध

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी यासीन मलिक (Yasin Malik) का समर्थन किया। इमरान खान ने भारत के फैसले का विरोध करते हुए ट्वीट किया, “कश्मीरी नेता यासीन मलिक की गैर-क़ानूनी क़ैद से लेकर झूठे आरोपों पर दोषी ठहराने तक उनके ख़िलाफ़ मोदी सरकार के फासीवादी तरीक़ों की कड़ी निंदा करता हूं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कश्मीर में हिंदुत्व फासीवादी मोदी शासन के सरकारी द्वारा पोषित आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए।”

बिलावल भुट्टो ने किया ट्वीट

पाकिस्तान सरकार में विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने मंगलवार को यासीन मलिक को लेकर ट्वीट किया था। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हम यासीन मलिक को रिहा करने की मांग करते हैं। उन पर लगाए गए झूठे आरोप ख़त्म करने चाहिए। उन्होंने तुरंत रिहा करके अपने परिवार से मिलने देना चाहिए। भारत को कश्मीर में सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करना चाहिए और मानवाधिकार उल्लंघन को रोकना चाहिए।”

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