84 लाख मजदूरों को खाना, 91 लाख मजदूरों को पहुंचाया घर, सरकार ने SC में दी ये दलीलें

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नई दिल्ली: कोरोना महामारी की वजह से देश में हुए लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को काफी परेशानी हुई। मजदूरों की इन्हीं समस्या को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने मजदूरों के रेल टिकटों के किराए, खाने की सुविधा और अन्य मामलों पर सवाल किए, जिनका केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया।

सरकार की ओर से दी गई ये दलीलें-

1 मई से 27 मई तक रेलवे ने देशभर में 3700 ट्रेनें चलवाईं, इन ट्रेनों के जरिए अब तक 91 लाख मजदूरों को उनके घर पहुंचाया जा चुका है। इसके साथ ही रेलवे ने 84 लाख मजदूरों को मुफ्त खाना मुहैया करवाया है।

80 फीसदी मजदूर उत्तर प्रदेश या बिहार के रहने वाले थे। यूपी-बिहार के बीच 350 से ज्यादा ट्रेनों को चलाया गया। जब तक सभी मजदूर घर नहीं पहुंच जाते, तब तक श्रमिक ट्रेनों को चलाया जाएगा।

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इसके बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि टिकटों का पैसा कौन दे रहा है ? इस सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर राज्य पैसा दे रहा है, जबकि कुछ राज्यों को रेलवे की ओर से रिइंबर्स किया जा रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने पूछा कि इस बात को कैसे साबित किया जाए कि मजदूरों से पैसा नहीं लिया जा रहा है और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है, तो इस पर जवाब देने के लिए सॉलिसिटर जनरल ने वक्त मांगा।

इसके अलावा पैदल चल रहे मजदूरों को लेकर किए गए सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि सरकारी बसें पैदल चल रहे मजदूरों को बस में बैठाकर उन्हें नजदीकी रेलवे स्टेशन तक पहुंचा रही हैं, ताकि वो ट्रेन से अपने घर जा सके।

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