नए भारत के निर्माण में हर दिव्यांग युवा- बच्चे की उचित भागीदारी जरूरी: PM मोदी

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प्रयागराज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रयागराज के परेड मैदान में 26,791 दिव्यांगों और बुजुर्गों के बीच करीब 56 हजार सहायक उपकरण वितरित किए। इस दौरान उन्होंने सामाजिक अधिकारिता शिविर को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि नए भारत के निर्माण में हर दिव्यांग युवा, दिव्यांग बच्चे की उचित भागीदारी आवश्यक है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘पहले की सरकारों के समय, इस तरह के कैंप बहुत ही कम लगा करते थे और इस तरह के मेगा कैंप तो गिनती के होते थे. बीते 5 साल में हमारी सरकार ने देश के अलग-अलग इलाकों में करीब 9,000 कैंप लगवाए हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘बीते कुछ समय में सरकार ने जो फैसले लिए हैं, जो अन्य योजनाएं शुरू की हैं, उनसे भी उन्हें लाभ हो रहा है। बीते 5 वर्षों में वरिष्ठ जनों का इलाज का खर्च पहले की अपेक्षा बहुत कम हुआ है। जन औषधि केंद्रों में दवाइयों की कीमत कम हुई है। हार्ट स्टैंट से जुड़े समान भी सस्ते हुए हैं।’

अपने भाषण को जारी रखते हुए पीएम मोदी ने कहा, ’60 वर्ष की आयु के बाद बुजुर्गों को एक निश्चित राशि पर एक निश्चित ब्याज मिले, उनका निवेश सुरक्षित रहे इसके लिए हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री वय योजना भी शुरू की थी। इसका मकसद यही था कि अगर बाजार में ब्याज दरें कम हो जाएं तो उसका प्रभाव उन पर कम से कम पड़े।’

सीनियर सिटिजन्स के जीवन के जीवन को सुगम बनाने के लिए पीएम मोदी ने कहा, ‘सीनियर सिटीजन्स की इस परेशानी को कम करने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। गरीब वरिष्ठ नागरिकों को भी जरूरी उपकरण मिलें, इसके लिए हमारी सरकार ने 3 साल पहले ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ शुरू की थी। इस योजना से करीब सवा लाख वरिष्ठ नागरिकों को उपकरण दिये जा चुके हैं।’

वहीं, उन्होंने आगे कहा कि नए भारत के निर्माण में हर दिव्यांग युवा, दिव्यांग बच्चे की उचित भागीदारी आवश्यक है। चाहे वो उद्योग हों, सेवा का क्षेत्र हो या फिर खेल का मैदान, दिव्यांगों के कौशल को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने दिव्यांगों की परेशानी को बयां करते हुए कहा कि दिव्यांगों पर अगर कोई अत्याचार करता है, उन्हें परेशान करता है, तो इससे जुड़े नियमों को सख्त किया है। दिव्यांगों की नियुक्ति के लिए विशेष अभियान चलाए। सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया है

एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर अलग-अलग भाषा होने पर भी दिव्यांग भाई बहनों को दिक्कतें होती थीं। पहले ये सोचा ही नहीं किया गया कि दिव्यांगों के लिए एक कॉमन साइन लैंग्वेज हो।
इसके लिए हमारी सरकार ने इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की है।

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