लोकसभा में गूंजा- ई-सिगरेट की तरह सभी तंबाकू पदार्थों पर लगे बैन, बीजेपी ने दिया ये जवाब…

ई-सिगरेट पर प्रतिबंध वाले इस विधेयक पर चर्चा के दौरान अधिकतर विपक्षी सदस्यों ने इसके साथ ही संपूर्ण तंबाकू उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की, लेकिन सत्तापक्ष...

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इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भंडारण एवं विज्ञापन ) प्रतिबंध विधेयक’ लोकसभा में बुधवार को ध्वनिमत से पारित हो गया।  ई-सिगरेट पर प्रतिबंध वाले इस विधेयक पर चर्चा के दौरान अधिकतर विपक्षी सदस्यों ने इसके साथ ही संपूर्ण तंबाकू उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की, लेकिन सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है क्योंकि इससे करोड़ों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है।

इस विधेयक को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में चर्चा के लिए रखा। विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से देश में युवा पीढ़ी को ई-सिगरेट जैसे नशे की चपेट में आने से रोका जा सकेगा। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि देश के लोगों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। ई-सिगरेट कंपनियां वर्ष के अंत तक देश में बड़े पैमाने अपने प्रॉडक्ट लॉन्च करने वाली थीं। एक स्कूल में जांच के दौरान 150 ई-सिगरेट मिली। इसका खतरा और बढ़े इससे पहले ही अध्यादेश लाया गया। ई-सिगरेट से अमेरिका में बड़ी संख्या में मौतें हो चुकी हैं। इसलिए कड़े कदम जरूरी हैं।

बता दें कि कानून बनने के बाद यह विधेयक हाल ही में इस संबंध में जारी किए गए अध्यादेश की जगह ले लेगा। केंद्र सरकार ने ई-सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाले गंभीर खतरे को देखते हुए 18 सितंबर को एक अध्यादेश के जरिए पूरे देश में ई-सिगरेट के आयात, उत्पादन, बिक्री, विज्ञापन, भंडारण और वितरण पर रोक लगा दी थी और सजा का प्रावधान भी तय कर दिया गया कि अगर कोई कानून तोड़ता है तो उसे कड़ी सजा होगी। सरकार ने इसके साथ ई-हुक्के को भी प्रतिबंधित किया है।

  1. सेहत के लिए है बेहद खतरनाक

स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-सिगरेट और ई-हुक्का दोनों को ड्रग्स माना है, लिहाजा सेहत पर इनके खतरनाक असर को देखते हुए ही इसे बैन करने का फैसला किया था। बता दें कि बैटरी ऑपरेटिड सिगरेट को बैन करने का प्रस्ताव नरेंद्र मोदी सरकार के ‘शुरुआती 100 दिनों के एजेंडे’ में शामिल है। ई-सिगरेट जिसे Electronic nicotine delivery system (ENDS) कहा जाता है, धूम्रपान करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय है।

  1. ड्रग्स की श्रेणी में आती है ई-सिगरेट

1 जून को हुई ड्रग कंसल्टेटिव कमेटी मीटिंग में एक्स्पर्ट्स ने इस बात की पुष्टि की है कि ई-सिगरेट और ऐसी अन्य कई डिवाइस को Drug and Cosmetics Act, 1940 (DCA) के सेक्शन 3(b) के तहत ड्रग माना जाएगा। लिहाजा DCA के सेक्शन 26(A) के तहत उन्हें बैन किया जाना चाहिए। ENDS के तहत ई-सिगरेट, हीट-नॉट बर्न डिवाइस, वेप, ई-शीशा, ई-निकोटीन, फ्लेवर्ड हुक्का और ऐसे अन्य प्रोडक्ट्स आते हैं।

  1. नियम तोड़ने पर सजा का प्रावधान

नए नियमों के अनुसार पहली बार अपराध के मामले में एक वर्ष तक कैद या एक लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों; और अगले अपराध के लिए तीन वर्ष तक कैद और पांच लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों लगाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके बाद इस नियम को तोड़ने पर 5 लाख रुपए जुर्माना और 3 साल तक जेल की सिफारिश की गई है। इसमें ई हुक्का भी शामिल है। ई सिगरेट का भंडारण भी दंडनीय होगा और इसके लिये छह महीने तक की सजा या 50 हजार रूपये तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है।

चर्चा के दौरान सभी तरह तंबाकू पदार्थों पर रोक लगाने उठी मांग-

विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार को तंबाकू वाले सिगरेट और ई-सिगरेट में फर्क नहीं करना चाहिए। अगर वह तंबाकू के सेवन पर अंकुश लगाना चाहती है तो उसे सभी तरह के सिगरेट पर पाबंदी लगानी चाहिए। उन्होंने अध्यादेश लाने के लिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘अध्यादेश लाने की आदी’ यह सरकार जल्दबाजी में जो भी कदम उठा रही है उससे अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल है। चौधरी ने कहा कि सरकार को बिना वजह अध्यादेश लाने से परहेज करना चाहिए।

वहीं इस पर भाजपा के वरुण गांधी ने कहा कि अगर सरकार सभी तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा देती है तो उन करोड़ों लोगों की जीविका का क्या होगा जो तंबाकू का उत्पादन करते हैं। उन्होंने कहा कि ई-सिगरेट का बड़े पैमाने पर चीन से आयात हो रहा है और सबसे खतरनाक बात यह है कि इनमें मौजूद तत्वों के नियमन की कोई व्यवस्था नहीं है। गांधी ने कहा कि ई-सिगरेट की लत सबसे ज्यादा युवाओं और बच्चों को लगती है, ऐसे में इस पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।

द्रमुक नेता सेंथिल कुमार ने कहा कि ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बजाय इसे तंबाकू निषेध से जुड़े कानून के दायरे में लाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध लगाना है तो सभी तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

बीजू जनता दल की शर्मिष्ठा सेठी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि ई-सिगरेट पर प्रतिबंध से युवाओं को फायदा होगा।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एम. भरत ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध की पैरवी करते हुए कहा कि युवाओं को ई-सिगरेट का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है और ऐसे में एक युवा होने के नाते वह इस कदम का पूरा समर्थन करते हैं।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने भी ई-सिगरेट पर प्रतिबंध के कदम का समर्थन किया।

एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध की मांग करते हुए सदन में गुटखे का पैकेट दिखाने का प्रयास किया और कहा कि वह इसे जांच के लिए स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को देना चाहते हैं और बताना चाहते हैं कि इस तरह के उत्पाद कितनी आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि आसन से उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली।

भाजपा के जगदंबिका पाल, रवि किशन, बसपा के रितेश पांडे, कांग्रेस के एमके विष्णु प्रसाद, बसपा के मलूक नागर और कई अन्य सदस्यों ने भी इस चर्चा में भाग लिया।

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