Hammer Missiles: चीन के साथ चल रहे विवाद के बीच, सरकार ने फ्रांस से मंगाई हैमर मिसाइल

भारतीय वायुसेना को जुलाई के अंत में राफेल लड़ाकू विमान मिलने वाला है. चीन के साथ बॉर्डर पर जारी तनाव के बीच देश की सेना की ताकत बढ़ रही है।

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New Delhi: चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच मोदी सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर फ्रांस से हैमर (Hammer Missiles) मिसाइलें मंगवाई हैं। इन मिसाइलों को राफेल विमानों में लगाया जाएगा जिससे इसकी क्षमता और भी घातक हो जाएगी। ये मिसाइल (Hammer Missiles) 60 से 70 किमी की दूरी तक किसी भी तरह के लक्ष्य पर निशाना लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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इसका पहला कन्साइनमेंट (consignment) 29 जुलाई को भारत पहुंच जाएगा। इन्हें 29 जुलाई को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर वायुसेना में शामिल किया जाएगा। फाइनल इंडक्शन सेरेमनी 20 अगस्त को होगी। इसके अलाव हैमर मिसाइल (Hammer Missiles) की खासियत के बारे मे बताए तो हैमर (हाइली एजाइल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज) मीडियम रेंज मिसाइल है, जिसे फ्रांस की वायुसेना और नेवी के लिए बनाया गया था। ये आसमान से जमीन पर वार करती है।

हैमर लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में भी मजबूत से मजबूत शेल्टर और बंकरों को तबाह कर सकती है। समाचार एजेंसी (ANI) के मुताबिक फ्रेंस ने वायु सेना द्वारा इन मिसाइलों की तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए फ्रांसीसी अधिकारी मौजूदा स्टॉक से भारत को ये मिसाइल सिस्टम मुहैया कराएंगे, जो उन्होंने अपने कुछ अन्य ग्राहकों के लिए तैयार किए थे।

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बता दें कि भारत ने फ्रांस के साथ 2016 में 58 हजार करोड़ में 36 राफेल फाइटर जेट की डील की थी। 36 में से 30 फाइटर जेट्स होंगे और 6 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट होंगे। ट्रेनर जेट्स टू सीटर होंगे और इनमें भी फाइटर जेट्स जैसे सभी फीचर होंगे। विमान की डिलीवरी पहले मई के अंत तक होने वाली थी, लेकिन दोनों देशों में कोरोना वायरस की स्थिति को देखते हुए इसे दो महीने के लिए रोक दिया गया था।

भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के तहत 36 राफेल जेट सितंबर 2022 तक आने वाले हैं। वायुसेना के पायलट और तकनीकी अधिकारी राफेल की उड़ान से लेकर संचालन को लेकर पूरी तरह प्रशिक्षित हो चुके हैं।

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