देश को जल्द मिलेगा CDS का नया पद, कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी से मिली मंजूरी…

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज यानी कि मंगलवार को दो अहम फैसलों पर मुहर लगी है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को मंजूरी दी है, वहीं कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का नया पद बनाने को मंजूरी दी है।

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केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज यानी कि मंगलवार को दो अहम फैसलों पर मुहर लगी है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को मंजूरी दी है, वहीं कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का नया पद बनाने को मंजूरी दी है। लिहाजा देश को पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (COA) जल्द ही मिलेगा।

पीएम मोदी ने 15 अगस्त को की थी घोषणा-

गौरतलब है कि सीडीएस मुख्यत: रक्षा और रणनीतिक मामलों में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के एकीकृत सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद बनाने का ऐलान किया था।

मालूम हो कि वर्ष 1999 में करगिल रिव्यू कमिटी ने इस पद का सुझाव दिया था, जो रक्षा से जुड़े मसलों पर सरकार का सिंगल-पॉइंट अडवाइजर होगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का मकसद भारत के सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को ऐतिहासिक सैन्य सुधार की घोषणा करते हुए कहा, भारत की तीनों सेनाओं के लिए एक प्रमुख होगा, जिसे सीडीएस कहा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद सीडीएस की नियुक्ति के तौर-तरीकों और उसकी जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।

प्रोटोकॉल के मामले में भी सीडीएस सबसे ऊपर रहेगा। सीडीएस मुख्यत: रक्षा और रणनीतिक मामलों में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के एकीकृत सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेगा। दरअसल, 1999 के करगिल युद्ध को ध्यान में रखते हुए देश की सुरक्षा प्रणाली में खामियों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति ने रक्षा मंत्री के एकीकृत सैन्य सलाहकार के रूप में सीडीएस की नियुक्ति का सुझाव दिया था।

सीडीएस की नियुक्ति से होने वाले लाभ-

माना जा रहा है कि CDS से सबसे बड़ा फायदा युद्ध के दौरान होगा। युद्ध के समय तीनों सेनाओं के बीच प्रभावी समन्वय कायम किया जा सकेगा। इससे दुश्मनों का सक्षम तरीके से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। दरअसल, सशस्त्र बलों की परिचालनगत योजना में कई बार खामियां देखी गईं हैं।

साल 1962 में चीन के साथ भारत का युद्ध हुआ था। इस युद्ध में भारतीय वायुसेना को कोई भूमिका नहीं दी गई थी, जबकि भारतीय वायुसेना तिब्बत की पठारी पर जमा हुए चीनी सैनिकों को निशाना बना सकती थी। उनके बीच तबाही मचा सकती थी। इसी तरह से पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध में भारतीय नौसेना को पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हमले की योजना से अवगत नहीं कराया गया।

माना जा रहा है,चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रहते हुए इस तरह की कोई खामी नहीं रहेगी और सेना प्रभावी ढंग से दुश्मन से निपट सकेगी।

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