अयोध्या जमीन विवाद: मुख्य न्यायाधीश ने कहा आज शाम तक पूरी हो जाएगी सुनवाई

मंगलवार को सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार के वकील ने मस्जिद बनाए जाने को ऐतिहासिक भूल करार दिया था। संभावित फैसले के मद्देनजर अयोध्या में 10 दिसंबर तक धारा 144 लागू है।

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16 अक्टूबर शाम 5 बजे तक अयोध्या मामले की सुनवाई हो जाएगी पूरी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई आज पूरी हो जाएगी। मुख्य न्याधीश ने कहा कि आज शाम 5 बजे तक मामले की सुनवाई पूरी हो जाएगी।  मंगलवार को 39वें दिन सुनवाई हुई तो रामलला विराजमान के वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने कहा कि उन्हें दलील पूरी करने के लिए बुधवार को एक घंटा चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि बुधवार को 40वां दिन है और यह आप लोगों की दलीलों का आखिरी दिन है। आपने लिखित दलीलें हमें दे रखी हैं।

जब वैद्यनाथन ने कहा कि मसला गंभीर है और आपको सुनना चाहिए तो चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह तो फिर दिवाली तक सुनवाई चलती रहेगी। बुधवार को दोनों पक्षकारों के लिए टाइम स्लॉट मंगलवार को ही तय कर दिया गया है।

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अगर आज सुनवाई पूरी हो जाती है, तो यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित तारीख से एक दिन पहले पूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए 17 अक्टूबर का शेड्यूल तय कर रखा है। आज दोनों पक्षकारों की दलील के बाद मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर दलील पेश की जाएगी और इसके बाद फैसला सुरक्षित कर लिया जाएगा।

बुधवार को अयोध्या मामले की 40वें दिन सुनवाई होगी। इससे पहले मंगलवार को, यानी 39वें दिन सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार के वकील के. परासरन ने मस्जिद बनाए जाने को ऐतिहासिक भूल करार दिया था। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश की गई दलील का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत विजय के बाद मुगल शासक बाबर द्वारा करीब 433 साल पहले अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ‘ऐतिहासिक भूल’ की गई थी। अब उसे सुधारने की आवश्यकता है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ के समक्ष पूर्व अटार्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन ने कहा, ‘अयोध्या में मुस्लिम किसी भी अन्य मस्जिद में इबादत कर सकते हैं। अकेले अयोध्या में 55-60 मस्जिदें हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए यह भगवान राम का जन्म स्थान है, जिसे हम बदल नहीं सकते।’ संवैधानिक पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

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