Babri Masjid Case: आडवाणी-जोशी समेत 32 लोगों पर फैसला आज

बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे पर 28 साल बाद सुनवाई होने जा रही है। आज सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट में फैसला होगा।

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Babri Masjid Case
बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे पर 28 साल बाद सुनवाई होने जा रही है। आज सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट में फैसला होगा।

New Delhi: बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे पर 28 साल बाद सुनवाई (Babri Masjid Case) होने जा रही है। आज यानी बुधवार को सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट में फैसला होगा। इस फैसले का पूरे देश को इंतजार है। क्योंकि इस केस में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित 32 लोगों का नाम सामने आया था। इन सभी को आज कोर्ट में शामिल होने को कहा गया था, लेकिन सुत्रों की माने तो यह सभी कोर्ट में अपनी पेशी नहीं देंगे, आखिर क्यों नहीं पहुंचेंगे कोर्ट इस बात का अभी खुलासा नहीं हुआ है।

बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में 30 सितंबर को आएगा फैसला

कब-कब क्या हुआ-

  • सन् 1853 में पहली हिंसा हिंदू-मुस्लिम के बीच हुई थी। जब निर्मोही अखाड़ा ने ढांचे पर दावा करते हुए कहा कि जिस जगह पर मस्जिद खड़ी है, वहां एक मंदिर हुआ करता था। जिसे बाबर के शासनकाल में नष्ट किया गया। जिसके बाद अगले 2 सालों तक इस मुद्दे को लेकर अवध में हिंसा भड़कती रही।
  • सन् 1859 में आजादी के पहले आंदोलने की वजह से माहौल थोड़ा शांत होता दिखाई दिया, लेकिन ब्रिटिश शासकों ने मस्जिद के सामने एक दीवार बना दी।परिसर के अंदर वाले हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी गई थी।
  • सन् 1885 में पहली बार यह मामला अदालत तक पहुंचा। हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील मंजूर नहीं की थी। इसके बाद से मामला गहराता गया और तारीखों का सिलसिला चलता रहा।
  • सन् 1934 की बात की जाए तो मस्जिद-मंदिर को लेकर दंगे भड़क गए। इन दंगों में मस्जिद के चारों तरफ की दीवार को नुकसान पहुंचा। ब्रिटिश सरकार ने इसका फिर से निर्माण किया था।
  • सन् 1949 ने हिंदुओं ने अपनी मर्जी से मूर्ति स्थापित कर दी, लेकिन सरकार ने मुर्ति पर ताला लगवा दिया। जिसके बाद भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में पाई गई। कहा जाता है कि मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति हिंदुओं ने रखवाई. मुसलमानों ने इस पर विरोध किया और मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। फिर दोनों पक्ष के लोगों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। इसके बाद सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगवा दिया।
  • इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 25 सितंबर 1990 में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष आडवाणी की रथ यात्रा बिहार को बिहार में रोक दिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हजारों कार सेवक अयोध्या में जमा हुए। जिसकी वजह से गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए।
  • सन् 1991 में उत्त प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमे बीजेपी सरकार ने जीत हासिल की। मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार हार गई। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई।
  • सबसे बड़ा दंगा 1992 मे हुआ था। ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद को ढहा दिया। अस्थाई राम मंदिर बना दिया गया। इसके बाद ही पूरे देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे फैल गए और इनमें करीब 2000 लोग मारे गए थे।

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