2 मिनट में यहां पढ़िए, गांधीजी के जीवन-चक्र से जुड़ी अहम बातें…

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर आज पूरा राष्ट्र बापू को याद कर रहा है। इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है...

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर आज पूरा राष्ट्र बापू को याद कर रहा है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। गांधी जी के पिता का नाम करमचंद उत्तमचंद गांधी था और वो पोरबंदर के दीवान थे। गांधीजी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाने में लगा दिया। सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजाद कराने वाले गांधीजी को दुनियाभर में लोग अपना आदर्श मानते हैं। इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। गांधीजी के पूरे जीवन चक्र को आप यहां पढ़ सकते हैं-

महात्मा गांधी जीवन-क्रम (2 अक्टूबर, 1869 – 30 जनवरी, 1948)

पूरा नाम- मोहनदास करमचंद गांधी

उन्हें ‘महात्मा गांधी और बापू’ के नाम से जाना जाता है

उन्हें पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया

4 जून 1944 को रंगून रेडियो से एक संदेश के जरिए बोस ने ‘राष्ट्रपिता’ कहा

जीवन परिचय-

जन्म- गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर 2 अक्टूबर सन् 1869 को हुआ

महात्मा गांधी अपने पिता की चौथी पत्नी के सबसे छोटे संतान थे

उनके पिता करमचंद गांधी ब्रिटिश के अधीन पोरबंदर के मुख्यमंत्री के दीवान थे

पुतलीबाई उनकी मां थीं जो बहुत धार्मिक महिला थीं 

विवाह-

13 साल की उम्र में उनका विवाह 14 साल की कस्तूरबा माखनजी से हुआ

कस्तूरबा जी को गांधी जी स्नेहवश ‘बा’ कहकर पुकारते थे

पति-पत्नी 1888 ई. तक लगभग साथ-साथ ही रहे

लेकिन, बापू के इंग्लैंड प्रवास के बाद करीब बारह वर्ष तक दोनों अलग रहे

इंग्लैंड प्रवास से लौटने के बाद शीघ्र ही बापू को अफ्रीका जाना पड़ा

जब 1896 में वे भारत आए तब ‘बा’ को अपने साथ ले गए

संतान-

गांधीजी सर्वप्रथम 15 वर्ष की उम्र में पिता बने

1885 में पहली संतान ने जन्म लिया और वह अल्प समय ही जीवित रह सका

मोहनदास और कस्तूरबा के चार संतान हुईं, जो सभी पुत्र थे

इन चारों बेटों के नाम थे- हरिलाल, मणिलाल रामदास और देवदास

शिक्षा-

गांधी जी ने पोरबंदर से  मिडिल और राजकोट से हाई स्कूल की पढ़ाई की

दोनों परीक्षाओं में शैक्षणिक स्तर वह एक औसत छात्र रहे

मैट्रिक के बाद की परीक्षा उन्होंने भावनगर के शामलदास कॉलेज से की

4 सितम्बर 1888 को बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड चले गए,

जहां कानून की पढ़ाई के लिए उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में दाखिला लिया

वकालत

इंग्लैंड और वेल्स बार एसोसिएशन द्वारा बुलाए जाने पर गांधीजी वापस बम्बई लौट आए और यहां अपनी वकालत आरम्भ की

बम्बई में वकालत में सफलता नहीं मिली, लिहाजा शिक्षक पद के लिए अर्जी दी, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली

फिर जीविका के लिए मुकदमे की अर्जियां लिखना शुरू किया, लेकिन किन्हीं कारणवश उन्हें काम छोड़ना पड़ा

इसके बाद सन् 1893 में एक वर्ष के करार के साथ दक्षिण अफ्रीका गए

दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश सरकार की फर्म नेटाल से यह करार हुआ था

जीवन का पहला आंदोलन

1893 में गांधीजी को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का सामना करना पड़ा

ट्रेन सफर के दौरान प्रथम श्रेणी का वैध टिकट होने के बावजूद उन्हें तीसरी श्रेणी में सफर करना पड़ा, इनकार करने पर जबरदस्ती ट्रेन से बाहर निकाल दिया गया

कई होटलों में भी गांधीजी के प्रवेश को निषेध कर दिया गया

अदालत में गांधीजी को न्यायाधीष के द्वारा पगड़ी उतारने को कहा गया, जिसे उन्होंने नहीं माना।

इन घटनाओं ने गांधीजी को बेहद प्रभावित किया, जिसके बाद उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य के अंतर्गत भारतीयों के सम्मान और स्वयं अपनी स्थिति के लिए प्रश्न उठाए।

इसके बाद उन्होंने 1906 में जुलु युद्ध में भूमिका निभाई। फिर 1916 से 1945 तक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए संघर्ष किया और कई तरह के आंदोलन किए

निधन-

नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1947 को गांधीजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

तब वे नई दिल्ली के बिड़ला भवन में रात के समय चहलकदमी कर रहे थे।

गांधी का हत्यारा नाथूराम गोडसे हिन्दू राष्ट्रवादी था, जिनके कट्टरपंथी हिंदू महासभा के साथ संबंध थे।

15 नवंबर 1949 को गोडसे और उसके सह षड्यंत्रकारी नारायण आप्टे को फांसी दी गई।

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