आखिर Twitter पर क्यों ट्रेंड कर रहा है #धरतीआबा_बिरसामुंडा, जानें यहां..

ट्विटर पर शुक्रवार की सुबह से एक नाम #धरतीआबा_बिरसामुंडा ट्रेंड कर रहा है। खबर खबर लिखे जाने तक इस हैशटैग के साथ एक लाख से ज्यादा ट्वीटस हो चुके हैं। इसके बाद लोगों में ये जानने की जिज्ञासा हुई कि आखिर ये बिरसा मुंडा हैं कौन और ये नाम ट्विटर पर आज ट्रेंड क्यों कर रहा है। तो चलिए हम आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह-

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नई दिल्ली: ट्विटर पर शुक्रवार की सुबह से एक नाम #धरतीआबा_बिरसामुंडा ट्रेंड कर रहा है। खबर खबर लिखे जाने तक इस हैशटैग के साथ एक लाख से ज्यादा ट्वीटस हो चुके हैं। इसके बाद लोगों में ये जानने की जिज्ञासा हुई कि आखिर ये बिरसा मुंडा हैं कौन और ये नाम ट्विटर पर आज ट्रेंड क्यों कर रहा है। तो चलिए हम आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह-

बिरसामुंडा आदिवासी जननायक के रूप में जाने जाते हैं। बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी में आदिवासियों के लिए अंग्रेजों से टक्कर ली। उनका जन्म 15 नवंबर को साल 1875 में झारखंड के रांची में हुआ था। आज उनकी जयंती है। वह मात्र 25 साल के थे, जब उनकी मृत्यु हो गई।

बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज की आजादी के लिए अंग्रेजों से सीधी टक्कर ली। उस वक्त वह तीर कमान से अंग्रेजों का सामना कर रहे थे। उन्होंने अंग्रेजों के फॉरेस्ट एक्ट के खिलाफ आवाज उठाई। बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों द्वारा आदिवासियों पर जुल्म, उनकी जमीन हड़पने की रणनीति का विरोध किया।

उन्होंने लोगों को भी अंग्रेजों द्वारा हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश सरकार को ये बात नागवार गुजरी। लोगों को भड़काने के आरोप में उन्हें 1895 में पहली बार जेल भेजा गया और दो साल की सजा हुई। हालांकि, बाद में उन्हें चेतावनी देकर रिहा कर दिया गया।

24 दिसंबर 1899 को लोगों में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा भड़का और लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इस आंदोलन के तहत लोगों ने तीर-कमान से पुलिस थानों में आग लगानी शुरू कर दी। अंग्रेजों की तरफ से गोलियां चल रही थीं। इस गोलीबारी में बड़ी तादात में मौतें हुई। बिरसा मुंडा को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

जनवरी, 1900 में डोमबाड़ी पहाड़ी पर एक और संघर्ष हुआ। बिरसा वहां एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस बार कई बच्चे और औरतें मारी गईं और बिरसा मुंडा को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया। 9 जून 1990 का वो दिन था, जब मात्र 25 वर्ष की आयु में बिरसामुंडा की जेल में रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई।

आदिसवासियों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों के लिए ही आज भी बिरसा मुंडा को बिहार, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में भगवान की तरह पूजा जाता है।

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