क्या है ‘वुहान कोरोना वायरस’? ये होते हैं इस बीमारी के लक्षण  

चीन में इन दिनों 'वुहान कोरोना वायरस' का कहर बढता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस वायरस की चपेट में आने से 80 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 2500 से अधिक इस वायरस से ग्रस्त बताए जा रहे हैं। भारत में बिहार के पटना में कोरोना वायरस का एक मामला सामने आया है। फिलहाल, पीड़ित युवती को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के लक्षण 2002 में फैली सार्स जैसे हैं, जिसमें संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में समस्या होती है।   

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नोएडा। चीन में इन दिनों ‘वुहान कोरोना वायरस’ का कहर बढता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस वायरस की चपेट में आने से 80 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 2500 से अधिक इस वायरस से ग्रस्त बताए जा रहे हैं। भारत में बिहार के पटना में कोरोना वायरस का एक मामला सामने आया है। फिलहाल, पीड़ित युवती को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के लक्षण 2002 में फैली सार्स जैसे हैं, जिसमें संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में समस्या होती है।

क्या है वुहान कॉरोना वायरस?

वुहान कॉरोना वायरस कोरोना वायरस फैमिली का सदस्य है, जो इससे पहले कभी सामने नहीं आया। दूसरे कोरोना वायरस की तरह ये भी जानवरों से उत्पन्न हुआ है। इस वायरस की चपेट में आने वाले लोगों में  SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) और MERS (Middle Eastern Respiratory Syndrome) जैसे लक्षण पाए गए हैं। ये दोनों सिंड्रोम्स भी कोरोना वायरस के कारण होते हैं जो कि जानवरों से आए थे।

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बता दें कि SARS और MERS के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस चमगादड़ में उत्पन्न हुआ था। ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं है कि वुहान कोरोना वायरस भी चमगादड़ या सांप से उत्पन्न हुआ होगा और किसी मध्यस्थ प्रजाति के जरिए ये वायरस इंसान के अंदर पहुंचा होगा। 2002 में 37 देशों के 8,000 से अधिक लोग SARS की चपेट में आए थे, जिसमें से 750 लोगों की मौत हो गई थी।

वुहान कोरोनावायरस के कारण पैदा होने वाले लक्षण

ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट ‘द गार्जियन’ के अनुसार वुहान कोरोनावायरस से ग्रस्त होने वाले लोगों में बार-बार खांसी आना, बुखार आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे कई लक्षण देखने को मिले है, जबकि कई गंभीर मामलों में शरीर के अंग खराब होने के मामले भी सामने आए हैं। ये वायरस सबसे ज्यादा व्यक्ति के फेंफड़ों पर असर करता और उन्हें खराब कर देता है।

पूरी तरह से इलाज संभव नहीं

डॉक्टर्स के अनुसार ये एक किस्म का वायरल निमोनिया है, जिसमें एंटीबायोटिक्स कोई असर नहीं करती हैं। फ्लू जैसी बिमारी के लिए प्रयोग की जाने वाली एंटीवायरल ड्रग्स भी इस पर बेअसर साबित हुई हैं। ऐसे में इस बीमारी से रिकवरी व्यक्ति के मजबूत इम्मयून सिस्टम पर ही निर्भर करती है। फिलहाल, वैज्ञानिक इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

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