प्याज और टमाटर के बाद अब आलू के दाम छू सकते हैं आसमान

उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य आलू के बड़े उत्पादकों में शुमार में हैं। लेकिन इस बार देश के सभी राज्यों में आलू की बोआई देर से हो रही है। अगैती आलू जो सितंबर के पहले सप्ताह में होती रही है, उसकी बोआई कहीं अक्टूबर के आखिरी सप्ताह अथवा नवंबर के पहले सप्ताह में हो सकती है।

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प्याज, टमाटर के बाद अब आलू के दाम छू सकते हैं आसमान

नई दिल्ली। सामान्य से अधिक बारिश और मानसून के देर से लौटने से आलू किसानों के साथ उपभोक्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। प्याज और टमाटर की मंहगाई से हलकान उपभोक्ताओं को अब जल्दी ही आलू भी परेशान कर सकता है। बारिश की वजह से आलू की बोआई में लगभग एक महीने की देरी हो चुकी है। इससे बाजार में नया आलू के पहुंचने में देरी होना तय है। इसके चलते उत्पादक बाजारों में ही पुराने आलू में महंगाई का रुख बनने लगा है।

उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य आलू के बड़े उत्पादकों में शुमार में हैं। लेकिन इस बार देश के सभी राज्यों में आलू की बोआई देर से हो रही है। अगैती आलू जो सितंबर के पहले सप्ताह में होती रही है, उसकी बोआई कहीं अक्टूबर के आखिरी सप्ताह अथवा नवंबर के पहले सप्ताह में हो सकती है। फर्रुखाबाद आस पास आलू की खेती वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। यहां के आलू के बड़े किसान व व्यापारी कौशल कुमार कटियार का कहना है कि इस बार बारिश के चलते बोआई नहीं हो पाई है।

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कच्चा आलू (अगैती) मात्र 60 दिनों में खुदाई लायक हो जाता है। बाजार की जरूरत को देखकर किसान इससे अच्छा पैसा कमा लेता है। लेकिन इस बार बोआई ही देर से हो रही है, जिसे भांपकर जिंस बाजार के खिलाड़ी सक्रिय हो गये हैं। बाजार में आलू का मूल्य 100 से डेढ़ सौ रुपये प्रति पैकेज (50 किग्रा) बढ़ाकर बोला जा रहा है। उत्पादक मंडियों में आलू 300 से 450 रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है, जो दिल्ली पहुंचकर 25 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के मूल्य निगरानी सेल की साइट पर आलू समेत अन्य जिंसों के रोजाना के भाव दर्ज हैं।

आलू विशेषज्ञ व कारोबार पर नजर रखने वाले सुशील कटियार का कहना है कि इस बार आलू 15 दिसंबर से पहले नहीं आ पायेगा। हालांकि पंजाब से थोड़ा बहुत नया आलू 15 नवंबर तक बाजार में आ सकता है, लेकिन इस बार वहां भी अगैती आलू का रकबा बहुत कम है। उनका कहना है कि कोल्ड स्टोर में फिलहाल पिछले साल के कुल उत्पादन का 35 फीसद फीसद आलू है। इसमें से 20 फीसद से अधिक आलू बोआई में बीज में चला जाएगा। जबकि अगले 60 से 70 दिनों के लिए आलू की जरूरत को पूरा करने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है। पुराने आलू के साथ बाजार में उतरने वाले नये आलू के भाव चढ़ सकते हैं।

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कृषि मंत्रालय के हार्टिकल्चर फसलों के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2018-19 के दौरान आलू की कुल पैदावार 5.30 करोड़ टन थी। कोल्ड स्टोर से निकासी आंकड़ों के मुताबिक मई में साढ़े छह फीसद, जून में 9.5 फीसद, जुलाई में 13.5 फीसद और अगस्त में 16 फीसद आलू की निकासी हुई है। जबकि अक्तूबर में अब तक 15 फीसद आलू कोल्ड स्टोर से निकला जा चुका है। इस बचे आलू के स्टॉक से बोआई के लिए बीज के रुप में बहुत ज्यादा आलू की खपत होती है। कोल्ड स्टोर में पड़े शेष आलू की मात्रा और घरेलू मांग में अंतर बढ़ सकता है। इसी को भांपकर बाजार में आलू अपना रंग दिखा सकता है।

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