वोडाफोन समेट सकती है भारत से अपना कारोबार,CEO का बड़ा बयान

अगस्त 2018 में वोडाफोन समूह की भारतीय इकाई आइडिया सेल्युलर के साथ मर्ज हुआ था। इस मर्जर के बाद वोडाफोन-आइडिया की तिमाही रिपोर्ट से ही लगातार नुकसान की खबरें आ रही है.....

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काफी लंबे अरसे से भारत हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है- CEO निक रीड

ऩई दिल्ली। टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आने वाले दिनों में भारत से अपना कारोबार समेट सकती है। दरअसल, वोडाफोन के CEO निक रीड ने भारत सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए सहयोग ना करने का आरोप लगाया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार निक रीड ने कहा है कि सरकार को बकाया राशि के भुगतान की मांग में कुछ नरमी बरतनी चाहिए, ताकि वोडाफोन समूह का कारोबार भारत में आगे भी बना रह सके। गैर मददगार नियमनों, अधिक टैक्स और उसके ऊपर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले से वित्तीय रूप से हमपर काफी बोझ है।

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दरअसल, भारत सरकार ने वोडाफोन-आइडिया समेत देश के अन्य टेलीकॉम कंपनियों को सरकार की बकाया राशि 92,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ टेलीकॉम कंपनियां सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई, लेकिन उन्हे यहां भी झटका लगा और शीर्ष अदालत ने सभी दूरसंचार कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के अंदर सरकार की बकाया राशि के भुगतान करने का आदेश दे दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लाइसेंस शुल्क के रूप में भारतीय एयरटेल पर 21,682.13 करोड़ रुपये, जबकि वोडाफोन-आइडिया पर 19,822.71 करोड़ रुपये का बकाया है। इस दौरान वोडाफोन-आइडिया के शेयर भी 4 रुपये के नीचे पहुंच गए हैं।

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अगस्त 2018 में वोडाफोन समूह की भारतीय इकाई आइडिया सेल्युलर के साथ मर्ज हुआ था। इस मर्जर के बाद वोडाफोन-आइडिया की तिमाही रिपोर्ट से ही लगातार नुकसान की खबरें आ रही है। वहीं वोडाफोन-आइडिया के कस्टामर्स की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

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