AGR मामले पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, सरकार-टेलिकॉम कंपनियों को लगाई फटकार…

सुप्रीम कोर्ट में AGR (Adjusted Gross Revenue) मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई। इस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार और टेलिकॉम कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई है।

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Supreme court

सुप्रीम कोर्ट में AGR (Adjusted Gross Revenue) मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई। इस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार और टेलिकॉम कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई है। बता दें कि देश की कई टेलिकॉम कंपनियों पर दूरसंचार विभाग के बकाया एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) को नहीं चुकाने के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, इस तरह की याचिका कभी दायर ही नहीं की जानी चाहिए थी, ऐसा क्यों किया जा रहा है। दरअसल, ऑयल इंडिया की ओर वकील मुकुल रोहतगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट काफी सख्त दिखा।

मामले में सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, आखिर ये हो क्यों रहा है? हम सख्त लहजे में कहना चाहते हैं, ये सब क्या बकवास है? हमें जो कहना था कह दिया है, आपने सिस्टम का क्या कर दिया है? पैसे वापस करने ही होंगे। कोर्ट की सख्ती का अंदाजा जस्टिस अरुण मिश्रा की फटकार से लगाया जा सकता है।

जस्टिस अरुण मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि क्या देश में कानून बचा है? एक डेस्क ऑफिसर ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही रोक दिया, ये क्या हो रहा है? उस अफसर को तुरंत यहां पर बुलाया जाए।

गौरतलब है कि AGR को चुकाने के लिए टेलिकॉम कंपनियों ने अधिक वक्त मांगा था, जिसे सरकार ने उन्हें दे दिया था। इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा कि आप बताएं कि सरकार ने ऐसा कैसे किया, क्योंकि ये अदालत की अवमानना है।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां-

”जस्टिस अरुण मिश्रा ने अदालत में पूछा कि आखिर डेस्क ऑफिसर के खिलाफ क्या एक्शन लिए गए हैं? अगर देश में कानून ही नहीं है तो क्या हम कोर्ट बंद कर दें? क्या ये सबकुछ पैसों के लिए नहीं है? हम हर किसी के खिलाफ अवमानना का केस दायर करेंगे।”

“जस्टिस अरुण मिश्रा ने पूछा कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम ने किस अधिकार से आदेश दिया कि भुगतान ना करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। अब अदालत ने सभी कंपनियों से पूछा है कि आप कारण बताएं कि आप पर अवमानना का केस क्यों ना चलाया जाए।”

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की अवमानना करने के लिए एयरटेल, वोडाफोन समेत अन्य कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर, सीएमडी को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा कंपनियों, टेलिकॉम विभाग के अधिकारियों को 17 मार्च को समन किया है।”

गौरतलब है कि मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस जेसी, शाह शामिल हैं।

टेलिकॉम कंपनियों पर कुल 92 हजार करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे चुकाने की तारीख 17 मार्च ही है। AGR (Adjusted Gross Revenue) संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूसेज और लाइसेंसिग फीस है।

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