बाल दिवस पर गुरुग्राम की इस नन्ही बच्ची ने बनाया डूडल, गूगल ने लगाया होम पेज पर

भारत में आज पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। वहीं गूगल ने भी अपने होम पेज पर डूडल बनाकर बाल दिवस को सेलिब्रेट किया है।

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Google Doodle

भारत में आज पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। वहीं गूगल ने भी अपने होम पेज पर डूडल बनाकर बाल दिवस को सेलिब्रेट किया है। बता दें कि गूगल हर साल चिल्ड्रेन्स डे पर डूडल लगाने के लिए बच्चों के बीच प्रतियोगिता करवाता है और बेस्ट डूडल इसके होम पेज पर लगाता है।

गूगल पर 7 साल की नन्ही दिव्यांशी का डूडल-

जानकारी के अनुसार, गूगल के होम पेज पर लगा इस बार का डूडल गुरुग्राम की नन्ही स्टूडेंट दिव्यांशी सिंघल ने बनाया है। दरअसल, 7 साल की नन्ही दिव्यांशी का डूडल ‘Walking Trees’ थीम पर बना है। यह डूडल आने वाली पीढ़ियों को वनों के संरक्षण और पेड़ों की कटान रोकने का संदेश दे रहा है।

बता दें कि बीते एक दशक से गूगल स्कूल स्टूडेंट्स से गूगल इंडिया होमपेज के लिए डूडल बनाने को कहता रहा है और बेस्ट डूडल बाल दिवस के मौके पर गूगल होमपेज पर दिखता है। इस वर्ष डूडल प्रतियोगिता की थीम ‘When I grow up, I hope…’ रखी गई थी।

बाल दिवस का मकसद-

गूगल डूडल में दिव्यांशी ने पेड़ों को चलते हुए दिखाया है। डूडल बनाने वाली नन्ही छात्रा ने पेड़ को जूते पहनाए हैं। गौरतलब है कि बाल दिवस हर साल देशभर में बच्चों की शिक्षा से जुड़ी जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों में खास आयोजन किए जाते हैं।

बच्चों से खास स्नेह रखने वाले देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को बच्चे प्यार से चाचा नेहरू बुलाते थे। पूर्व पीएम का कहना था कि ‘बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं’। बच्चों के नाम ही जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन भी समर्पित है।

उल्लेखनीय है कि यूनाइटेड नेशंस की ओर से तय किए गए यूनिवर्सल चिल्ड्रेन्स डे के अनुसार पहले बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता था। 1964 में पं. नेहरू के निधन के बाद निर्णय लिया गया है कि बच्चों से उनके लगाव के चलते उनका जन्मदिन राष्ट्रीय बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को नए भारत का निर्माता माना जाता है। बच्चों से उनका प्यार कई मौकों पर देखा गया। जवाहर लाल नेहरू अक्सर काम के बीच भी वे बच्चों को कहानियां सुनाने लगते थे।

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