World River Day: सूखती नदियां और गहराता जल संकट, नहीं लिया सबक…तो बूंद-बूंद को मोहताज होगा भारत

घरों से निकला छोटा-बड़ा कूड़ा नदियों की कोख में जमा हो रहा है। और कई लोग प्लास्टिक इधर-उधर फेंकते हैं।

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World River Day
घरों से निकला छोटा-बड़ा कूड़ा नदियों की कोख में जमा हो रहा है। और कई लोग प्लास्टिक इधर-उधर फेंकते हैं।

अक्सर आपने देखा होगा जेब और घरों से निकला छोटा-बड़ा कूड़ा नदियों की कोख में जमा हो रहा है। और कई लोग प्लास्टिक इधर-उधर फेंकते हैं। बरसाती नालों और छोटी नदियों से होते हुए बड़ी नदियों में समा जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों के बीच जागरूकता का अभाव हैं। आप सोच रहे होंगे कि हम इस विषय में बात क्यों कर रहे है तो हम आपको बता दें आज विश्व नदी दिवस (World River Day) है।

क्यों बनाया जाता है विश्व नदी दिवस

सितंबर के चौथे रविवार को जनता को नदियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विश्व नदी दिवस (World River Day) मनाया जाता है। आगरा में आधा दर्जन से ज्यादा नदियां हैं। इनमें चंबल को छोड़ दिया जाए तो यमुना और करबन प्रदूषित हो चुकी हैं। इससे यहां जल संकट गहराता जा रहा है। आगरा की प्यास बुझाने को बुलंदशहर से पाइपलाइन डालकर गंगाजल लाना पड़ रहा है।

दरअसल, आगरा में सभी नदियां करीब 500 किमी की लंबाई में बहती हैं। इनमें सबसे अधिक लंबी यमुना है। 1990 तक भरपूर पानी (World River Day) रहता था। जिन नदियों में बाढ़ आती थी, उनका पानी की कमी से सूखना आश्चर्यजनक है। यमुना में 61 नाले गिर रहे हैं, जिन्हें टैप किया जाना चाहिए।

शहरी क्षेत्र में भूजल स्तर में हर साल एक मीटर तक की गिरावट

बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसायटी द्वारा शहरी क्षेत्र के 38 केन्द्र के भूगर्भ जल विभाग उप्र के विगत दस वर्ष के आंकड़ों का अध्ययन करने पर पता लगा है कि सबसे अधिक भूजल स्तर में गिरावट अमरपुरा क्षेत्र में आई है। यहां भूजल स्तर में 2011 से 2020 तक 16.70 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है। कमला नगर में 8.55 मीटर, छलेसर में 8.49 मीटर एवं तोरा व खंदारी में भी भूजल स्तर में गिरावट जारी है। औसतन आगरा के शहरी क्षेत्र में 10 सेमी से 1 मीटर की गिरावट प्रतिवर्ष आई है।

जल स्तर गिरने के साथ नष्ट हो रही है

आगरा की जैव विविधता नदियों का अपना ईको सिस्टम होता है। नदियों के सूखने से वह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जैव विविधता नष्ट हो रही है। परिणामस्वरूप पर्यावरण और जलीय जीवों के संरक्षण का खतरा है। इसके परिणामस्वरूप ईको सिस्टम खत्म होने से जैव विविधता भी नष्ट हो रही है। भूगर्भीय जल स्तर तेजी से नीचे की ओर जा रहा है।

नंदियों की गंदगी के लिए ये कदम उठाया जा सकता है

  • आगरा जिले के 3687 तालाबों में से सिर्फ 166 तालाबों तक ही नहरों का पानी पहुंच रहा है। नदियों के किनारे हरित पट्टी का निर्माण कर घास, मूंज और पौधारोपण कर मिट्टी कटान को रोकने के प्रयास करने होंगे।
  • यमुना में पानी बहाव की उचित मात्रा निर्धारित करके इसकी तलहटी में सिल्ट जमने से रोका जा सकता है।
  • सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए एवं शहरों व कारखानों के नालों का पानी शोधित कर नदियों में डाला जाए।
  • राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनाकर राजस्थान और मध्य प्रदेश की कई नदियों के पानी को उत्तर प्रदेश के आगरा में सीमावर्ती नदियों में जोड़ा जा सकता है।

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