पढ़े स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उनके कुछ अनमोल विचार 

स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका में अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया था और दुनिया में देश का नाम रोशन किया था। आज उनकी पुण्यतिथि है।

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Swami Vivekananda

New Delhi: स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकता में हुआ था। विवेकानंद बचपन से ही तीव्र बुद्धि के धनी थे। इनके घर का नाम नरेंद्र दत्त था। 1897 में मानवता की सेवा के लिए स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। इसका नाम विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम पर रखा था।

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1884 में उनके पिता विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद अत्यंत गरीबी की मार ने स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के चित्त को कभी डिगने नहीं दिया। संगीत, साहित्य और दर्शन में विवेकानंद को विशेष रुचि थी। तैराकी, घुड़सवारी और कुश्ती उनका शौक था। अपने जोशपूर्ण और बेबाक भाषणों के कारण विवेकानंद युवाओं में काफी लोकप्रिय थे।

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एक बार स्वामी विवेकानंद को विश्व धर्म परिषद में पर्याप्त समय नहीं दिया गया। किसी प्रोफेसर की पहचान से अल्प समय के लिए स्वामी विवेकानंद को शून्य पर बोलने के लिए कहा गया। अपने भाषण के प्रारंभ में जब स्वामी विवेकानंद ने ‘अमेरिकी भाइयों और बहनों’ कहा तो सभा के लोगों के द्वारा करतल ध्वनि से पूरा सदन गूंज उठा। उनका भाषण सुनकर विद्वान चकित हो गए। इस सब से अभिभूत होकर अमेरिकी मीडिया ने उन्हें ‘साइक्लॉनिक हिन्दू’ का नाम दिया। लेकिन 39 साल की कम उम्र में ही इनका निधन हो गया था।

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4 जुलाई 1992 को स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई थी। इनके दिए गए संदेश आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्तोत्र हैं। इनकी कह गए संदेश युवाओं में एक नया जोश भर देते हैं। हर साल 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार जो जीवन में नई ऊर्जी भरने का काम करते हैं।

पवित्रता, धैर्य और उद्यम-ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हूं। जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु है।प्रेम जीवन है, द्वेष मृ्त्यु है। किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या न आए, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं। यह कभी मत कहो कि ‘मैं नहीं कर सकता’, क्योंकि आप अनंत हैं।

 

 

 

 

 

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