दिल्ली में 2 आरोपी गिरफ्तार, 25 से 40 हजार रुपये में बेचते थे एंटीवायरस दवा

रेमडिसिविर की डिमांड ज्यादा होने की वजह से कालाबाजारी बढ़ती जा रही है। कईं राज्यों में इंजेक्शन नहीं मिल रहे।

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Remdesivir Injection
रेमडिसिविर की डिमांड ज्यादा होने की वजह से कालाबाजारी बढ़ती जा रही है। कईं राज्यों में इंजेक्शन नहीं मिल रहे।

New Delhi: एक तरफ देश में कोरोना का कोहराम मचा हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ हॉस्पिटलों में न बेड है और न ही ऑक्सीजन है। इस बीच एंटीवायरस दवा रेमडिसिविर (Remdesivir Injection) की डिमांड ज्यादा होने की वजह से कालाबाजारी बढ़ती जा रही है। कईं राज्यों में आसानी से ये इंजेक्शन नहीं मिल रहे। इस वैक्सीन को लेने के लिए लोगों को 20 से 40 हजार रुपये तक चुकाना पड़ रहा हैं। इसलिए ये जानना जरूरी है कि नकली रेमडेसिविर (Remdesivir Injection) की पहचान कैसे की जा सकती है। 

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फर्जी रेमडेसिविर बेचने वाले गिरफ्तार

दिल्ली में फर्जी रेमडेसिविर (Remdesivir Injection) बनाने वाली एक गैंग का खुलासा हुआ है। ये गैंग उत्तराखंड से नकली रेमडेसिविर बनाकर दिल्ली और आसपास के राज्यों में में बेच रही है। इस मामले में पुलिस ने शोइब खान और मोहन कुमार झा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 10 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए हैं। ये दोनों आरोपी कोरोना पीड़ित परिवारों को 25 से 40 हजार रुपये में बेचते थे। 

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जानकारी के अनुसार, रेमडेसिविर (Remdesivir Injection) के पैकेट पर अंग्रेजी में For use in लिखा हुआ है, जबकि नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह ने इस पर for use in. लिख कर रखा हुआ है। मतलब नकली वाले में कैपिटल लेटर से शुरुआत नहीं हो रही है। इस तरह आप आसानी से नकली रेमडिसिविर का पता लगा सकते है। 

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