विवादों में रहा राफेल पहली बार भर रहा उड़ान, जानिए पूरी स्टोरी

गणतंत्र दिवस के अवसर पर कई तरह की परेड निकाली जाती है, लेकिन पहली बार फ्रांस से मिला राफेल लड़ाकू विमान उड़ान भर रहा है।

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Rafale Viman Update
गणतंत्र दिवस के अवसर पर कई तरह की परेड निकाली जाती है, लेकिन पहली बार फ्रांस से मिला राफेल लड़ाकू विमान उड़ान भर रहा है।

New Delhi: गणतंत्र दिवस के अवसर पर कई तरह की परेड निकाली जाती है, लेकिन पहली बार फ्रांस से मिला राफेल लड़ाकू विमान उड़ान (Rafale Viman Update) भर रहा है। साथ ही टी-90 टैंकों, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली, सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ अपनी सैन्य (Rafale Viman Update) ताकत दुनिया को दिखा रहा है। 

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रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि गणतंत्र दिवस (Republic Day 2021) की परेड में 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की झांकी निकाली जाएगी और केंद्रीय मंत्रालयों, साथ ही बलों की नौ झांकी समेत 32 झांकियों में देश की सांस्कृतिक, आर्थिक उन्नति और सैन्य ताकत की मजबूत झलक देखने को मिलेगी। ओडिशा में कालाहांडी के मनमोहक लोक नृत्य बजासल, फिट इंडिया मूवमेंट और आत्मनिर्भर भारत के अभियान की पेशकश की जाएगी।

राफेल भारत के लिए कितना फायदेमंद-

राफेल (Rafale Viman Update) में हैमर मिसाइल होने की वजह से भारत को बड़ी कामयाबी मिलेगी। ये मिसाइल किसी प्रकार का बंकर या मटियामेट करने वाली ताकत है। पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में इसकी मारक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है। इस घातक हथियार की मारक क्षमता तगड़ी है। ये 20 किलोमीटर से 70 किलोमीटर की दूरी तक अचूक निशाना लगाने में शातिर है। दूरी की वजह से लड़ाकू विमान दुश्मन के रेडार पर नजर नहीं आता है।

HAMMER मिसाइल (Republic Day 2021) किट में अलग-अलग साइज के बम भी फिट किए जा सकते हैं। ये 125 किलो, 250 किलो, 500 किलो और 1000 किलोग्राम के भी हो सकते हैं। राफेल की ताकत हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश है। फ्रांस के अलावा, मिस्र और कतर के पास ही ये विमान हैं। 

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भारत बहुत ज्यादा रकम चुका रहा है?

विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार (PM Modi) ने 7.87 यूरो यानी करीब 59000 करोड़ रुपये की ज्यादा कीमत पर इस विमान का सौदा किया है।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मार्च में कहा था कि एनडीए सरकार ने एक-एक विमान के लिए 1670 करोड़ रुपये चुकाए जबकि यूपीए सरकार ने 570 करोड़ रुपये तय किए थे। हालांकि रक्षा मंत्रालय की आंतरिक गणना में दिखाया गया है कि हर राफेल विमान यूपीए वाली डील के मुकाबले 59 करोड़ रुपये सस्ता पड़ रहा है।

क्या है डील-

फ्रांसीसी कंपनियों को अक्टूबर 2019 से ऑफसेट्स (Republic Day 2021) पर डिलीवर करना होगा। सरकार एक तकनीकी दलील दे रही है कि कोई ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट मंजूर नहीं किया गया है क्योंकि काम इस साल शुरू होना है और दैसॉ एविएशन को अपने इंडियन पार्टनर्स के बारे में रक्षा मंत्रालय से इजाजत लेनी होगी। हालांकि दैसॉ रिलायंस एविएशन लिमिटेड ज्वांइट वेंचर को भारत और फ्रांस, दोनों ही सरकारों को सपॉर्ट करना होगा।

सरकार का कहना है कि यूपीए सरकार इसलिए ये डील नहीं कर सकी क्योंकि दैसॉ एविएशन और एचएएल के बीच सहमति नहीं बनी थी। भारत में ये विमान बनाने पर बातचीत 2012-14 में टूट गई थी। इसके बाद राफेल विमान खरीदने का एकमात्र रास्ता ये था कि पुरानी डील रद्द की जाए और नए सिरे से बातचीत की जाए। साफ है कि नए सिरे से की गई डील का खामियाजा एचएएल को भुगतना पड़ा है। 

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