PM मोदी ने किया अयोध्या का जिक्र, बोले- समाज ने 2010 में पेश की थी एकता-अखंडता की मिसाल

अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी हुई है। मामले पर नवंबर में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला दे सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ''मन की बात'' में अयोध्या मामले पर बात की है।

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Mann Ki Baat
पीएम मोदी ने बताया चेरी ब्लॉसम का सच, कई अहम मुद्दों पर की चर्चा

अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी हुई है। मामले पर नवंबर में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला दे सकता है। इसी लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ”मन की बात” में अयोध्या मामले पर बात की है।

पीएम ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए समाज किस तरह से सतर्क रहा है, इसका उदाहरण सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से मिला था।

प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ने कहा, ”हमारा समाज हमेशा से देश की एकता और सद्भाव के लिए सतर्क रहा है। मुझे याद है कि जब सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राम मंदिर पर अपना फैसला सुनाया, तो भांति-भांति के लोग मैदान में आ गए थे। कुछ बयानबाजों और बड़बोलों ने सिर्फ खुद को चमकाने के लिए न जाने कैसी-कैसी बातें की थीं। ये सब पांच-दस दिन तक चलता रहा, लेकिन जैसे ही फैसला आया तो आनंददायक बदलाव देश ने महसूस किया ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, साल 2010 में राम मंदिर पर जैसे ही फैसला आया तो राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, सभी संप्रदायों के लोगों, साधू-संतो और सिविल सोसाइटी के लोगों ने बहुत संतुलित बयान दिए थे। न्यायपालिका के गौरव का सम्मान किया। इसे हमें ध्यान देना चाहिए कि देश में कितनी बड़ी ताकत है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने 40 दिन तक लगातार सुनवाई की। कोर्ट ने सुनावई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनावई करने वाली पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला –

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सितंबर, 2010 के फैस अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला-के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर 14 अपीलों पर पांच जजो की पीठ ने सुनवाई की है। दरअसल, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसलिए उम्मीद है कि 17 नवंबर से पहले अयोध्या मामले पर फैसला आ जाएगा.

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