PM Modi लाएंगे 157 बेशकीमती कलाकृतियां, चोरी-तस्करी के जरिए पहुंची थी अमेरिका

PM Modi US Visit: पीएम मोदी Narendra Modi की अमेरिका यात्रा इस बार बेहद अहम रही है। इस बार अमेरिका से 157 नायाब कलाकृतियां वापस ला रहे है।

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PM Modi US Visit
पीएम मोदी Narendra Modi की अमेरिका यात्रा इस बार बेहद अहम रही है। इस बार अमेरिका से 157 नायाब कलाकृतियां वापस ला रहे है।

पीएम मोदी (PM Modi US Visit) की अमेरिका यात्रा इस बार बेहद अहम रही है। इस बार अमेरिका से 157 नायाब कलाकृतियां वापस ला रहे है। आपको बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ दोस्ती का नया अध्याय शुरू हो गया है। संयुक्त राष्ट्र में कामयाबी के झंडे गाड़कर लौट रहे पीएम मोदी देश की धरोहरों को भी वापस ला रहे हैं। यानी कहा जा सकता है चुनाव से पहले पीएम नरेंद्र मोदी भारत के लि बहुत कुछ करने वाले है।

पुरावशेष तस्करी और चोरी कैसे हो रही है

अमेरिका ये कलाकृतियां और पुरावशेष तस्करी और चोरी करके कभी अमेरिका (PM Modi US Visit) ले गए थे। साथ ही राष्ट्रपति जो बाइडन ने सांस्कृतिक वस्तुओं के अवैध कारोबार शुरू कर दिया था। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को कहा गया कि लगभग आधी कलाकृतियां सांस्कृतिक हैं, जबकि बाकी आधे में हिंदू, जैन से संबंधित मूर्तियां हैं।

कितनी कलाकृतियों की सूची है

बता दें 157 कलाकृतियों की सूची में 10 वीं शताब्दी के बलुआ पत्थर में रेवंत के डेढ़ मीटर बेस रिलीफ पैनल से लेकर 12वीं शताब्दी की 8.5 सेंटीमीटर ऊंची कांसे की नटराज की मूर्ति शामिल है। दरअसल मोदी सरकार ने दुनिया भर से भारत की प्राचीन वस्तुओं और कलाकृतियों को वापस लाने की मुहिम छेड़ रखी है। ये 157 कलाकृतियां उसी मुहिम के तहत वापस लाई जा रही हैं।सरकारी सूत्रों ने बताया कि 1976 से 2013 के बीच विभिन्न सरकारें विदेश से केवल 13 पुरावशेष ही वापस ला पाईं। 2014 में जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तबसे अब तक 200 से अधिक पुरावशेष या तो वापस आ गए हैं या वापस आने की प्रक्रिया में हैं। सूत्रों के अनुसार, 2004 और 2014 के बीच केवल एक कलाकृति ही भारत आई।

2004 और 2014 के बीच केवल एक कलाकृति ही भारत लौट पाई। देखा जाए तो मोदी सरकार चार दशक पहले की तुलना में अधिक प्राचीन भारतीय कलाकृतियां वापस लाई है।आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बहुत सी कलाकृतियां 11वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी की अवधि के बीच की हैं। कुछ पुरावशेष 2000 ईसा पूर्व के हैं। टेराकोटा का एक फूलदान दूसरी शताब्दी का है। करीब 45 पुरावशेष ईसा पूर्व दौर के हैं। कांस्य संग्रह में मुख्य रूप से लक्ष्मी नरायण, बुद्ध, विष्णु, शिव पार्वती और 24 जैन तीर्थंकरों की प्रसिद्ध मुद्राओं की अलंकृत मूíतयां हैं। देवताओं के अलावा कंकलामूíत, ब्राह्मी और नंदीकेश की भी मूर्तियां हैं। इन कलाकृतियों में तीन सिर वाले ब्रह्मा, रथ पर आरूढ़ सूर्य, शिव की दक्षिणामूर्ति, नृत्य करते गणेश की प्रतिमा भी है। इसी तरह खड़े बुद्ध, बोधिसत्व मजूश्री, तारा की मूर्तियां हैं।टेराकोटा की 56 कलाकृतियां। 

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