राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने इस तरह दी देश को ईद का बधाई

राष्ट्रपति कोविंद ने हिंदी के साथ-साथ उर्दू में भी संदेश लिखकर देशवासियों को ईद-उल-अजहा के त्योहार की बधाई दी.

0
357
Eid Ul Adha
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने इस तरह दी देश को ईद का बधाई

Delhi: आज यानी शनिवार देश और दुनियाभर में ईद-उल-अजहा (Eid Ul Adha) का त्योहार मनाया जा रहा है. इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) समेत देश के कई नेताओं ने देशवासियों को मुबारकबाद (Eid Ul Adha Mubarak) दी. राष्ट्रपति कोविंद ने तो ईद (Eid) की बधाई का संदेश हिंदी के साथ-साथ उर्दू में भी लिखा. राष्ट्रपति कोविंद (Ramnath Kovind) ने अपने ट्वीट में लिखा. “ईद मुबारक, ईद-उल-जुहा का त्‍योहार आपसी भाईचारे और त्‍याग की भावना का प्रतीक है तथा लोगों को सभी के हितों के लिए काम करने की प्रेरणा देता है. आइए, इस मुबारक मौके पर हम अपनी खुशियों को जरूरतमंद लोगों से साझा करें और कोविड-19 की रोकथाम के लिए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें.”

Virat on online gamling: कोहली पर ऑनलाइन गैंबलिंग का आरोप, मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दर्ज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने संदेश (Eid Ul Adha) में लिखा. “ईद उल अजहा पर बधाई, यह दिन हमें एक न्यायपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और समावेशी समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है. भाईचारे और करुणा की भावना को आगे हमेशा बनी रहे” आपको बता दें कि ईद-उल-अजहा का त्योहार ईद की नमाज़ के साथ शुरू होता है, सभी मुस्लिम पुरुष मस्जिदों या ईद गाह में ईद की नमाज अदा करते हैं. ईद की नमाज के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू होता है. हालांकि, इस साल कोरोनावायरस के चलते लोगों को अपने घरों में ही ईद की नमाज अदा करनी होगी. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, धू-अल-हिज्जा की 10 तारीख को बकरीद (Bakrid 2020) मनाई जाती है.

पंजाब में नकली शराब पीने से 26 लोगों की मौत, सीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए आदेश

बता दें कि इस्लाम धर्म में बकरीद का खास महत्व है. इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी और अज़ीज़ चीज़ की कुर्बानी देने के लिए कहा था. हज़रत इब्राहिम के लिए सबसे अज़ीज़ और प्यारे उनके बेटे हज़रत ईस्माइल ही थे. लेकिन हज़रत इब्राहिम ने बेटे के लिए अपनी मुहब्बत के बजाए अल्लाह के हुक्म को मानने का फैसला किया और अपने बेटे को अल्लाह के लिए कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए. कहा जाता है कि जब हज़रत इब्राहिम के बेटे हज़रत ईस्माइल को इस बारे में पता चला तो वे भी कुर्बान होने के लिए राज़ी हो गए. हज़रत इब्राहिम ने आंखें बंद करके जैसे ही अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई तो अल्लाह ने उनके बेटे की जगह दुंबा भेज दिया. इस तरह उनके बेटे बच गए और दुंबा कुर्बान हो गया. इसके बाद से ही अल्लाह की राह में कुर्बानी देने का सिलसिला शुरू हो गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here