आखिरकार भारत के सामने झुका नेपाल, ये फैसला लिया वापस

नेपाल हुआ मजबूर, भारत के न्‍यूज चैनलों से हटाया बैन। दर्शकों और लोगों के भारी विरोध प्रदर्शन के कारण सभी भारतीय न्यूज चैनलों का गुरुवार सुबह से प्रसारण शुरू हो गया।

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विवादित नक्शे को गूगल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भेजेगा नेपाल

Kathmandu: भारत और नेपाल के बीच चल रही तनातनी पर नेपाल (Nepal) को आखिरकार झुकना पड़ा। केबल ऑपरेटरों ने नेपाल सरकार (Nepal) के इशारे पर भारत के न्यूज चैनलों पर रोक लगा दिया था जिसे अब हटा दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक दर्शकों और लोगों के भारी विरोध प्रदर्शन के चलते भारतीय न्यूज चैनलों का गुरुवार सुबह से प्रसारण शुरू हो गया।

आखिर क्यों नेपाल ने बैन किए भारतीय मीडिया चैनल

हालांकि ओली सरकार (KP Sharma Oli) की ओर से अभी तक इस पर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। बताया जा रहा है कि (Nepal) केबल ऑपरेटरों ने बैन लगाया था और उसे खुद ही हटा दिया है। हालांकि अभी भी कुछ समाचार चैनलों पर यह प्रतिबंध लगा रहेगा।

आपको बता दें कि बीते कुछ समय से भारत और नेपाल के बीच तनाव की स्थिति है। नेपाल ने एक नया मैप जारी कर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा भारतीय इलाकों पर अपना दावा ठोका था। हालांकि भारत ने कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि यह इलाके भारत के ही हैं।

अभिषेक मनु सिंघवी: क्या खो दिया नेपाल के पीएम ने अपना मानसिक संतुलन?

हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने एक बेतुका बयान से भारत और नेपाल के बीच बवाल मच गया था। पीएम ओली ने भारत पर सांस्कृतिक अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए कहा था कि भगवान राम भारतीय नहीं बल्कि नेपाली हैं। उन्होंने कहा था कि भारत ने नकली अयोध्या बनाकर नेपाल की सांस्कृतिक तथ्यों पर अतिक्रमण किया है।

केपी ओली के इस बयान पर भारत के कई नेता ने उनके मानसिक संतुलन के बारे में टिप्पणी की है। इसेक अलावा अयोध्या राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास ने नेपाली पीएम ओली को मूर्ख कहा। उन्होंने कहा नेपाल का भारत और अयोध्या से त्रेता युग से संबंध रहा। शास्त्रों में अयोध्या प्रमाणित है, नेपाल के पीएम को ज्ञान ही नहीं है।

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