राज्यसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए किया गया स्थगित

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New Delhi: कोरोना वायरस महामारी (Corona Virus) के चलते आयोजित राज्यसभा का मानसून सत्र (Monsoon Session) बुधवार को अपने निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Rajya Sabha Adjourned) हो गया। 14 सितंबर से शुरू हुए सत्र में राज्यसभा से कई विधेयक पारित किये जा चुके हैं जिनमें हाल ही में लागू कुछ अध्यादेशों की जगह लेने के लिए लाये गये विधेयक भी शामिल हैं।

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पहले से तय समय के अनुसार मानसून सत्र एक अक्टूबर तक चलना निर्धारित था। लेकिन अब राज्यसभा को स्थगित कर दिया (Rajya Sabha Adjourned) गया है। छोटी सी अवधि होने के बावजूद सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया जबकि हंगामे के कारण आठ विपक्षी सदस्यों को रविवार को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। राज्यसभा के सत्र को सभापति वेंकैया नायडू ने ऐतिहासिक बताया।

सभापति एम वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) ने सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि यह सत्र कुछ मामलों में ऐतिहासिक रहा क्योंकि इस दौरान उच्च सदन के सदस्यों को बैठने की नई व्यवस्था के तहत पांच अन्य स्थानों पर बैठाया गया। ऐसा उच्च सदन के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। इसके अलावा सदन ने लगातार दस दिनों तक काम किया। शनिवार और रविवार को सदन में अवकाश नहीं रहा।

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उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया गया या लौटा दिया गया। इसी के साथ छह विधेयकों को पेश किया गया। सत्र के दौरान पारित किए गए विधेयकों में कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक, महामारी संशोधन विधेयक, विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक, जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक शामिल हैं।

संसद से कुछ ही दिनों पहले पारित कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने आज संसद भवन परिसर में मौन विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन कर रहे सांसद अपने हाथों में तख्तियां लिये हुए थे जिन पर ‘किसानों को बचाओ, मजदूरों को बचाओ, लोकतंत्र को बचाओ’ जैसे नारे लिखे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिभा से भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक मार्च निकाला।

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