आज के दिन देश में लगी थी इमरजेंसी, इस फैसले पर स्टे नहीं लगता तो Indira Gandhi को देना पड़ता इस्तीफा

25-26 जून की रात को आपातकाल के आदेश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के दस्तखत के साथ देश में आपातकाल लागू हो गया।

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History of Emergency
25-26 जून की रात को आपातकाल के आदेश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के दस्तखत के साथ देश में आपातकाल लागू हो गया।

New Delhi: 46 साल पहले देश में आज के दिन तत्कालीन आपातकाल (History of Emergency) लगाया गया था। 25-26 जून की रात को आपातकाल के आदेश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के दस्तखत के साथ देश में आपातकाल लागू हो गया। रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज में संदेश सुना कि भाइयों और बहनों, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। लेकिन इससे सामान्य लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। 

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बता दें राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने तस्वीर शेयर कर हुए लिखा कि लोकतंत्र का मतलब है कि मनमानी चीजें न हों, लोकतंत्र का मतलब होता है फैसलों को साझा करना, लोकतंत्र का मतलब ये नहीं कि इस प्रक्रिया को बर्बाद कर दिया जाए। 

सत्ता में बने रहने के लिए हर तरीका अपनाया

इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने सत्ता में बने रहने के लिए हर तरीका अपना लिया, ये भारत के लोकतंत्र का एक टर्निंग पॉइंट भी था और सबसे काला अध्याय भी था। आपमें से ज्यादातर लोग इसे भूल गए होंगे इसलिए आज हम अपनी इस सीरीज के पहले भाग में आपको इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में याद दिला रहे है। क्योंकि आज ही के दिन गांधी खानदान की विरासत को बचाने के लिए संवैधानिक व्यवस्था को भी नष्ट कर दिया।

दरअसल, साल 1971 में लोकसभा चुनाव के वक्त आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब देश में लोक सभा और राज्यों के विधान सभा चुनाव एक साथ नहीं हुए थे क्योंकि, इंदिरा गांधी की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति ने 27 दिसम्बर 1970 को लोक सभा भंग कर दी थी।

विकिलीक्स ने बताई थी ये बात

इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के घर में 1975 से 1977 के दौरान एक अमेरिकी जासूस था। ये खुलासा विकिलीक्स ने कुछ साल पहले किया था। विकिलीक्स के अनुसार, इमर्जेंसी के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर में मौजूद इस जासूस की उनके हर राजनीतिक कदम पर नजर थी। ये सारी जानकारी अमेरिकी दूतावास को मुहैया करा रहा था। हालांकि केबल्स में इस जासूस के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। 

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किसकी सलाह पर किया था आपातकाल

पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम एसएस राय ने जनवरी 1975 में ही इंदिरा गांधी को आपातकाल लगाने की सलाह दी थी। यानी इमर्जेंसी लगाने की योजना पहले से तय थी। मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर उन्हें निर्देश दिया गया था कि आरएसएस के उन सदस्यों और विपक्ष के नेताओं की लिस्ट तैयार कर ली जाए, जिन्हें अरेस्ट किया जाना है। इसी तरह की तैयारियां दिल्ली में भी की गई थीं।

चुनाव के वक्त धोखाधड़ी करने का लगा आरोप

इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) रायबरेली सीट से 1 लाख 10 हजार वोटों से जीती थीं और ये वोट राजनारायण को मिले कुल 71 हजार वोटों से कहीं ज्यादा थे। इस दौरान आरोप लगाया गया कि इंदिरा गांधी ने इस सीट पर चुनाव, धोखाधड़ी और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके जीता है और ये मामला इसके बाद यूपी के इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया।

पहला आरोप था कि चुनाव में सरकारी अफसर यशपाल कपूर की मदद लेना और उन्हें अपना इलेक्शन एजेंट बनाना। यशपाल कपूर, इंदिरा गांधी के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी नियुक्त थे।

दूसरा आरोप था कि स्वामी अद्वैतानन्द को 50 हजार रूपये रिश्वत देकर उन्हें रायबरेली से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में खड़ा किया गया। आज के दौर में इसे डमी कैंडीडेट कहते है। यानी ऐसा उम्मीदवार, जो वोट काटने का काम करेगा और इंदिरा गांधी ने इस तरकीब का इस्तेमाल 50 साल पहले किया था। 

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