कृषि कानूनों में सुधार पर राजी नहीं किसान, इतने पन्नों का डॉक्यूमेंट किया तैयार

किसानों का प्रदर्शन आज 9वें दिन भी लगातार जारी है। दिल्ली से हरियाणा और उत्तर प्रदेश से सटे कई इलाकों में लोगों को जाम का सामना करना पड़ रहा है।

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Farmers Protest
कृषि कानूनों में सुधार पर राजी नहीं किसान, इतने पन्नों का डॉक्यूमेंट किया तैयार

New Delhi: कृषि कानून (Agriculture Law) के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) आज 9वें दिन भी लगातार जारी है। दिल्ली से हरियाणा और उत्तर प्रदेश से सटे कई इलाकों में लोगों को आज भी जाम का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली से लगी कई सीमाएं बंद की जा चुकी है। वहीं इस मुद्दें पर गुरुवार को केंद्र सरकार और किसानों की बातचीत के बाद ये तो साफ हो गया है कि फिलहाल अभी किसानों की ये लड़ाई लंबी चलेगी।

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केंद्र और किसानों के गुरुवार को बीच 4वीं बातचीत हुई। वहीं अब शनिवार को फिर बातचीत होने वाली है। इसी बीच क्रांतिकारी किसान यूनियन के लीडर दर्शनपाल ने कहा कि “केंद्र सरकार इन कानूनों में कुछ सुधार पर राजी हुई है, लेकिन हम नहीं। हमने उन्हें बता दिया है कि पूरे कानून से ही हमे परेशानी है। हम कल (5 दिसंबर) होने वाली मीटिंग से पहले आज (4 दिसंबर) आपस में बातचीत करेंगे और अपनी रणनीति तैयार करेंगे।”

 केंद्र बोले- MSP रहेगी, किसान बोले- मुद्दा कानूनों का है

केंद्र और किसानों के बीच चौथे दौर की बातचीत करीब 7 घंटे तक चली। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को भरोसा दिलाया कि तय मिनिमम सपोर्ट प्राइज (MSP) को छुआ भी नहीं जाएगा। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इस एक्ट के प्रावधानों में किसानों को सुरक्षा दी गई है। किसानों के जमीन की लिखा-पढ़ी कोई नहीं कर सकता।

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वहीं इस मिटिंग में किसानों ने कहा कि ये मामला इकलौते MSP का नहीं है, बल्कि कृषि कानून (Farmers Protest) को पूरी तरह वापस लेने का है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केवल एक नहीं, बल्कि कई मसलों पर बातचीत होनी चाहिए।

किसानों ने आपत्तियों से भरा 10 पेज का डॉक्यूमेंट तैयार किया

इससे पहले दो दिसंबर को किसानों ने पांच बार और सरकार ने दो बार बैठकें की थी। किसानों ने कृषि कानूनों (Farmers Protest) में अपनी आपत्तियों का 10 पेज का डॉक्यूमेंट तैयार किया हुआ है। उधर, क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार कृषि कानूनों को खत्म करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए। उन्होंने कहा कि पांच दिसंबर को देशभर में किसान बिल के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे।

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