15 को किसानों के साथ बातचीत, कमेटी या सरकार कौन करेगा बात?

सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को Farmers Bill 2020 पढ़ेगी। इसके बाद वकील की राय लेकर अगला कदम बढ़ाएगी।

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Farmers Bill 2020
सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को Farmers Bill 2020 पढ़ेगी। इसके बाद वकील की राय लेकर अगला कदम बढ़ाएगी।

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों (Farmers Bill 2020) को लेकर समिति गठित तो कर दी है। लेकिन अब भी किसानों और सरकार के बीच बात बनती हुई नजर नहीं आ रही। 15 जनवरी को होने वाली बातचीत को लेकर कया लगाए जा रहे है कि बात बन जाएगी। हालांकि मंत्रालय की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है लेकिन जानकारी के अनुसार सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पढ़ेगी। इसके बाद वकील की राय लेकर (Farmers Bill 2020) अगला कदम बढ़ाएगी। 

तीनों कृषि कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

बता दें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से किसानों की चिंताओं को सुनने के लिए कमेटी गठित करने के बाद सरकार की तरफ से बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता है। इससे पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) के नेतृ्त्व में तीन मंत्रियों की समिति किसान यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रही थी। दोनों के बीच 8 दौर की बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला था। पिछली बार 8 जनवरी को हुई बैठक में दोनों पक्ष 15 जनवरी को बातचीत को लेकर सहमत हुए थे। लेकिन अब कमिटी गठित हो गई है तो किसानों और कमिटी के बीच बातचीत होनी चाहिए!

दरअसल, किसानों (Farmers Bill 2020) की ओर से पहले कमेटी का विरोध किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख बरता और कहा कि अगर मामले का हल निकालना है तो कमेटी के सामने पेश होना होगा। ऐसे में अब कोई भी मुद्दा होगा, तो कमेटी के सामने उठाया जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ किया कि कमेटी कोई मध्यस्थ्ता कराने का काम नहीं करेगी, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाई जाएगी। 

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क्यों हो रहा है विरोध-

अगल-अलग राज्यों के किसान और किसान नेता लगातार कृषि कानूनों (Farmers Bill 2020) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और इनकी जगह किसानों के साथ बातचीत कर नए कानून लाने को कह रहे हैं। किसानों को लगता है कि लाए गए नए कानून पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान छोटे किसानों को होगा।

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