किसानों का हल्ला बोल जारी, क्या सरकार आंदोलनकारियों की मांगों को करेगी मंजूर?

केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए कृषि कानून के विरोध में 26 नवबंर को पंजाब और हरियाणा के किसानों ने धरना शुरु कर दिया था।

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Farmers Bill 2020
केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए कृषि कानून के विरोध में 26 नवबंर को पंजाब और हरियाणा के किसानों ने धरना शुरु कर दिया था।

New Delhi: किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब इस मुद्दे पर सियासत शुरु हो गई है। दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक घमासान थमने का नाम नही ले रहा। इस बीच पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह (CM Amarinder Singh) ने गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात की है। खास बता यह है कि पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल (Prakash Singh Badal) ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए अपना पद्म विभूषण सम्मान वापिस कर दिया है। बता दें कि किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। पंजाब सहित देश के कई राज्यों के किसान इस कानून का विरोध कर रहे हैं। 

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन (Farmers Protest 2020) 8वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी किसानों ने पांच दिसंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। साथ ही तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए कहा है। दिल्ली से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ लगने वाली कई सीमाओं पर किसान पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे हैं। सिंघु बॉर्डर पर हजारों किसान डेरा डाले हुए हैं, जबकि कई किसानों ने टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर और चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह बंद कर दिया हैं।

एक तऱफ सरकार इस बिल को वापिस लेने को तैयार नही है, तो वहीं दूसरी तरफ आंदोलनकारी अपनी मांगों पर डटे हुए है। इस बीच मंगलवार को बैठक में (MSP) पर प्रजेंटेशन के बाद मंत्रियों ने बैठक में टी ब्रेक लिया। मंत्रियों ने किसानों से भी चाय के लिए पूछा। तभी एक किसान ने अचानक खड़े होकर कहा कि आप हमारे साथ सिंघु बॉर्डर पर जलेबियां और लंगर चखें। यही नहीं, किसानों ने मंत्रियों की ओर से दिए गए चाय के प्रस्ताव को भी ठुकरा (Farmers Protest 2020) दिया। 

दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी, राजधानी में जाने से किया इंकार

इस बैठक में सरकार ने किसान नेताओं (Farmers Protest 2020) को कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो मौजूदा कानून की समीक्षा करेगी। नए कृषि कानून पर चर्चा के लिए सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि किसान नेता अपने-अपने संगठनों से 4-5 लोगों के नाम दें और एक समिति बनाए जिसमें सरकार के प्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे और इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। यानी कहा जा सकता है कि इस बार की बैठक में भी कोई समाधान नही निकाला गया।

जानें आखिर कब शुरु हुआ आंदोलन- 

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पास किए गए कृषि कानून के विरोध में 26 नवबंर को पंजाब और हरियाणा के किसानों ने धरना (Kisan Andolan) शुरु कर दिया था। सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रेक्टर और ट्रकों में भरकर दिल्ली को कूच करने आ गए। हालांकि इस मुद्दे को लेकर किसानों का प्रदर्शन पंजाब में काफी समय चल रहा था। बता दें किसानों को जमा होने से रोकने के लिए बीजेपी शासित हरियाणा में कई जगहों पर धारा-144 लगा दी गई थी। हरियाणा के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा है कि 26 और 27 नवंबर के लिए पंजाब के लिए बस सेवा भी बंद कर थी। किसानों के धरने को देखते हुए दिल्ली मेट्रो को भी बंद करने का फैसला किया गया था। 

नोएडा-दिल्ली जाने वाले ध्यान दें, इन रास्तों का करें इस्तेमाल

कब-कब क्या हुआ-

संडकों पर उतरे किसानों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा था। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने 3 दिसंबर को बातचीत करने को कहा, लेकिन किसानों ने सरकार की एक ना सुनी और आंदोलन (Kisan Andolan News) जारी रखा। इस बवाल के बाद कृषि कानून को लेकर 2 दिन से विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों को दिल्ली जाने की इजाजत मिल गई थी। इस बीच दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करने वाले किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई। जिसके बाद ये आंदोलन पहले से ज्यादा उग्र हो गया। पुलिस ने फिर आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन किसान दिल्ली जाने की मांग पर अड़े रहे। 

आपको बता दें 27 नवंबर को किसानों के समर्थन में जंतर-मंतर के बाहर प्रदर्शन कर रहे एक समूह के करीब 70 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया (Farmers Bill 2020) था। प्रदर्शन करने वालों में वामपंथी ट्रेड यूनियन के सदस्य, एसएफआई के सदस्य और जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र शामिल थे। खास बात यह है कि कई जगह पर पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए रास्तों तक को खोद दिया था, जिससे आम यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

दरअसल, किसान सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर के बाद अब नोएडा-दिल्ली के चिल्ला बॉर्डर पर भी डट गए हैं। चिल्ला बॉर्डर पर हजारों की संख्या में डटे किसानों ने प्रदर्शन (Farmers Bill News) किया और मंगलवार शाम से ही लोगों को जाम की परेशानी से जूझना पड़ा। लोगों से अपील की गई है कि वह नोएडा लिंक रोड की बजाए नोएडा जाने के लिए एनएच-24 और डीएनडी का इस्तेमाल करे। टिकरी, झारोदा, झटीकरा बॉर्डर को भी बंद कर दिया गया है।

बता दें कि किसानों की मांग है कि उन्हें दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की इजाजत दी जाए। उनका कहना है कि अगर पुलिस उन्हें जाने नहीं देगी तो वो सड़क पर ही धरना (Kisan Andalon Update Live) देंगे। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सराकर पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने लिखा, ‘कहा- किसान की आय दुगनी होगी, – ‘मित्रों’ की आय हुई चौगुनी और किसान की होगी आधी। झूठ की, लूट की, सूट-बूट की सरकार’ 

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